केटलोनिआ संकट: स्पेन टूटा तो यूरोप के बाक़ी देश भी टूट सकते हैं

October 8, 2017 by No Comments

स्पेन में केटलोनिआ को लेकर राजनीतिक संकट लगातार गहराता जा रहा है. एक तरफ़ जहाँ कातोलोनिया लीडरशिप आज़ादी की घोषणा करने की बात कर रहे हैं वहीँ सोसिएतात सिविल कैटलना(SCC) एकजुटता के लिए मार्च निकाल रहा है. बार्सिलोना में रविवार को केटलोनिआ की आज़ादी के ख़िलाफ़ बड़ा आन्दोलन होने की उम्मीद है.

SCC का कहना है कि क्षेत्र की बड़ी आबादी ऐसी है जो स्पेन से अलग नहीं होना चाहती लेकिन वो अक्सर ख़ामोश रहती है. SCC नेता लेकिन इस मार्च के ज़रिये केटलोनिआ की आज़ादी की मांग करने वाले लोगों को ये पैग़ाम देना चाहते हैं कि एकजुटता ही सबके फ़ायदे में है. ऐसी उम्मीद की जा रही है कि इस मार्च में नोबेल विजेता मारिओ वर्गास भी भाग लेंगे. उनके अलावा जोसेप बोर्रेल्ल भी इसमें रहेंगे, ऐसी उम्मीद की जा रही है.

इस प्रदर्शन के ज़रिये कैटलन नेताओं से अपील की जायेगी कि वो बातचीत से इस मामले का हल निकालें.कई दशकों में ये स्पेन का सबसे भारी राजनीतिक संकट है.

हालाँकि इस मामले में पूरी अनिश्चितता है कि आगे क्या होगा. कैटलन पार्लियामेंट को आज़ादी की घोषणा करने से रोकने के लिए स्पेन की संवैधानिक अदालत ने पहले ही कैटलन पार्लियामेंट को प्रतिबंधित कर दिया है. इसके बावजूद भी कैटलन पार्लियामेंट की कार्यवाही होने की उम्मीद है. अब सारी निगाहें कैटलन नेता कार्ल्स पुइग्देमोन्त पर हैं.

इस बीच संकट के लगातार बढ़ते जाने से दूसरे यूरोपियन देश भी परेशान हैं. इस बारे में जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल और यूरोपियन यूनियन के प्रेसिडेंट जीन क्लॉउड़े जंकर ने फ़ोन पर बात की. ऐसा माना जा रहा है कि अगर स्पेन से केटलोनिआ अलग होता है तो इसका प्रभाव यूरोप के दूसरे देशों में भी पड़ेगा और ऐसा हो सकता है कि दूसरे देशों में भी राष्ट्रीयता के आधार पर आन्दोलन होने लगें. इसी को देखते हुए फ़्रांस, जर्मनी और दूसरे देशों की निगाहें स्पेन पर हैं. गौरतलब है कि स्पेन यूरोप का चौथा सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश है. इसकी आबादी का 16% हिस्सा केटलोनिआ में रहता है.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *