केटलोनिआ संकट: स्पेन पर लगे तख़्ता पलट के आरोप

स्पेन के केटलोनिआ संकट में अब एक नया मोड़ आ गया है. स्पेन की सरकार ने केटलोनिआ की ऑटोनोमी को छीनने का फ़ैसला कर लिया है. इसके बाद केटलोनिआ के अलगाववादी नेता इसे तख़्ता पलट का नाम दे रहे हैं जबकि स्पेन के विदेश मंत्री अलफोंसो दस्तिस ने इस विश्लेषण को ग़लत क़रार दिया है.

दस्तिस ने एक समाचार चैनल से बात करते हुए कहा कि सरकार वही कर रही है जो उसे संविधान के मुताबिक़ करना चाहिए.उन्होंने कहा कि अगर कोई भी तख़्ता पलट करने की कोई कोशिश कर रहा है तो वो है केटलोनिआ.

हालाँकि इस बीच स्पेन की सरकार ने केटलोनिआ के ऊपर पूरी तरह से कण्ट्रोल करने की योजना बना ली है. अब ये देखने वाली बात होगी कि इससे केटलोनिआ संकट ख़त्म होता है या और आगे बढ़ता है.

क्या है केटलोनिआ संकट
स्पेन के उत्तर-पूर्व में पड़ने वाले केटलोनिआ को देश के अन्दर ऑटोनोमी प्राप्त थी लेकिन कई दशकों से यहाँ के अलगाववादी नेता ये मांग कर रहे थे कि केटलोनिआ को अलग देश का दर्जा दिया जाए. इसको लेकर ये तर्क दिया जाता रहा है कि केटलोनिआ की अपनी एक अलग पहचान है. इसमें एक बात और समझने वाली है कि ये स्पेन का सबसे पैसे वाला हिस्सा माना जाता है और मशहूर शहर बार्सिलोना भी इसी का हिस्सा है. अब इस बारे में जहां लगातार बातचीत का दौर चलता रहा है, केटलोनिआ के नेता चार्ल्स पुइग्देमोन्त ने एलान कर दिया कि 1 अक्टूबर को जनमत संग्रह होगा. इस जनमत संग्रह को देश की सबसे बड़ी अदालत ने असंवैधानिक बताया और रोकने के आदेश दिए.

इतना होने पर भी जनमत संग्रह कराया गया जिसे स्पेन की सरकार ने पुलिस बल के ज़रिये रोकने की कोशिश भी की.जनमत-संग्रह में 42 फ़ीसदी वोटिंग हुई और 90% लोगों ने केटलोनिआ को आज़ाद किये जाने के पक्ष में मतदान किया. इसमें एक और बात ये समझने वाली है कि जिन पार्टियों को केटलोनिआ के 2015 में हुए चुनाव में 40 फ़ीसदी वोट मिले थे, उन्होंने इसका बायकाट किया था. इसका अर्थ है कि इस जनमत संग्रह से कुछ ठीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता. बहरहाल, अब ये संकट किस और जाएगा ये तो आने वाला समय ही बतायेगा.

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