“तब क्यों नही बोली…अब क्यों?”- ये सवाल आपको ख़ुद पर आज़माना चाहिए

दस साल पहले क्यों नहीं बोली अब क्यों बोली?..फ़्लाइट में कोई छेड़ता रहा वहाँ क्यों नहीं बोली, उतरकर सोशल मीडिया live क्यों की?..रास्ते में कोई छू गया तो घर आकर …

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जब समय अच्छा ना हो तो सोचिए कि हर ख़ुशी, हर उम्मीद, हर आस, हर जवाब हमारे अपने अंदर है

उलझी डोर का छोर: आज मन सुबह से ही ख़राब-सा है..वो होता है न कि बेवजह बस मन न लगे कहीं..न किसी से बात करना अच्छा लगे न किसी का …

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