समाज एक ऐसा शब्द है, जिसे बयां करना बहुत ही मुश्किल हैं। क्यूंकि इसके लिए उसे बिलकुल गहराई से समझना…

ना तो मुझे तारीख़ याद है और ना ही ये भी सही से याद है कि वो साल 1994 था…

इसी साल व्यंग्यकार अमोल सरोज की पहली किताब प्रकाशित हुई है.”अमोल सरोज स्टेटस वाला” नाम की इस किताब का कांसेप्ट…