छात्र संघ चुनावों को तरसता लखनऊ विश्विद्यालय

September 8, 2017 by No Comments

जहां देश के अलग अलग विश्विद्यालयों में चुनाव हो रहे हैं वहीँ लखनऊ विश्विद्यालय में चुनाव का नाम-ओ-निशान नहीं है. छात्र संघठन लगातार प्रशासन से ये मांग उठाते रहे हैं कि छात्रसंघ चुनाव कराये जाएं लेकिन विश्विद्यालय प्रशासन गोल-मोल जवाब देकर टालता रहता है. छात्र नेता ये आरोप लगाते रहे हैं कि चुनाव ना होने की वजह से प्रशासन छात्र-हित का कोई काम नहीं करता. हॉस्टल में गंदगी, खाने की ख़राब क्वालिटी, सेंट्रल मेस, सीटों में कटौती, फ़ीस वृद्धि को लेकर छात्र नेताओं ने लगातार प्रदर्शन किये हैं लेकिन प्रशासन इस पर आश्वासन से अधिक कुछ करता नज़र नहीं आता. SFI, समाजवादी छात्रसभा, NSUI, ABVP, और AISA जैसे संघठन लगातार कैंपस में सक्रिय रहते हैं लेकिन चुनाव और पद ना होने की वजह से छात्र-नेता सिवाय फ़रयाद के कुछ कर नहीं पाते.

अब सवाल उठता है कि आख़िर क्या वजहे हैं कि छात्र नेता प्रशासन के सामने घुटने टेक कर बैठे हैं. सबसे बड़ी वजह तो छात्र नेताओं में कोई एकता ना होना. पहले तो सबके अपने अपने दल हैं और जो कुछ लोग इसको लेकर आगे बढ़ते भी हैं वो भी कुछ ख़ास आगे नहीं बढ़ पाते. लखनऊ विश्विद्यालय में बीएससी के छात्र ने हमसे बातचीत में बताया कि छात्र नेता कुछ करना नहीं चाहते. छात्र-राजनीति में इंटरेस्ट रखने वाले नौयुवक ने हमसे कहा कि यहाँ प्रदर्शन सिर्फ़ फ़ोटो-छपवाने के लिए होता है..अगले दिन अगर किसी की तस्वीर अखबार में छप गयी तो बस उसका काम हो गया.

एक और वजह जो छात्रों से बातचीत में सामने आयी वो है आज के छात्रों का रवैया. कई छात्रों ने हमसे बताया कि जहां पहले छात्र-नेता छात्र के पास आकर अपना पक्ष रखता था अब छात्र ख़ुद छात्र नेताओं की चापलूसी करते हैं. लखनऊ विश्विद्यालय में इस बार हॉस्टल की फ़ीस, गंदगी, सीटों में कमी जैसे कई बड़े मुद्दे रहे और इन मुद्दों पर छात्र-नेता सामने आये भी लेकिन ये बात सच है कि आम छात्र इन प्रोटेस्ट से बिलकुल दूर रहता है. इसी बात का फ़ायदा विश्विद्यालय प्रशासन भी उठाता है और गोल-मोल जवाब देकर मामला टालता रहता है. इस बार भी प्रशासन का कहना है कि वो चुनाव कराएगा लेकिन ये चुनाव होगा इसकी उमीद कम ही है.

असल में एक और परेशानी ये है कि जिस पार्टी की सरकार राज्य में होती है उसका छात्र संघठन प्रशासन से कोई बैर नहीं करना चाहता. मौजूदा दौर में भाजपा की सरकार होने की वजह से ABVP प्रशासन से उलझने से डरता है. इसकी वजह क्या है ये तो शायद बताने की ज़रुरत भी नहीं.

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