Children’s Day: ‘चाइल्ड एब्यूज’ एक जुर्म, उठनी चाहिए इसके खिलाफ आवाज़..

November 14, 2017 by No Comments

आज देशभर में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिवस को बालदिवस के रूप में मनाया जाता है। कहा जाता है कि नेहरू बच्चों से बहुत प्यार करते थे। बात करें बच्चों की तो बच्चे बहुत ही प्यारे और मासूम होते हैं। इन भोले-भाले बच्चों के साथ अक्सर कुछ ऐसे चीज़ें हो जाती हैं। जो उनकी मासूमियत के चीथड़े उड़ा देती हैं।

जुर्म को जुर्म नहीं कहना और मानना भी एक जुर्म है। अगर आपको पता लग जाता है की कोई इंसान किसी संगीन जुर्म का आरोपी है तो उसके खिलाफ आवाज़ उठाना जरूरी है। खासकर बच्चों के मामले में। बच्चे बहुत मासूम और नादान होते हैं। जिनका कोई गन्दी नीयत वाला शख्स बड़ी आसानी से शोषण कर सकता है। क्योंकि बच्चों को इस बारे में पता नहीं होता की उनके साथ जो रहा है वह गलत है और कानून के तहत एक जुर्म है। पहले तो हमें बच्चों के इस बारे में बेसिक शिक्षा देनी चाहिए जिसे परिवार में अक्सर नजरअंदाज किया जाता है कि बच्चों से ऐसी-वैसी बातें नहीं करनी चाहिए। परिवार की इसी लापरवाही की वजह से मासूम बच्चे अक्सर चाइल्ड एब्यूज का शिकार होते हैं और उनके इस बारे में पता भी नहीं चलता। बच्चों पर इस से मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से काफी हानि पहुँचती हैं। अगर इस मामले में हम उन्हें छोटी-छोटी बातें समझाएं तो बच्चे शोषण का शिकार होने से बच सकते हैं। अगर फिर भी ऐसा कुछ होता है तो कम से कम बच्चे अपने परिवार वालों को इस बारे में बता तो सकते हैं। अगर बच्चा परिवार में ऐसी कोई शिकायत करता है तो उसे हमें सीरियसली लेना चाहिए और इस मामले में आवाज़ उठानी चाहिए और उस शख्स के खिलाफ शिकायत दर्ज करवानी चाहिए फिर चाहे वह आपके घर का ही कोई शख्स क्यों न हो। अक्सर देखा जाता है कि समाज में शर्मसार होने का सोचकर परिवार वाले अपराधी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करते। जिससे इस अपराध को और बढ़ावा मिलता है। हमारे देश में 10 से 7 बच्चे इस का शिकार बनते हैं लेकिन इसके खिलाफ आवाज़ नहीं उठाई जाती। जोकि अपराधियों को सरेआम चाइल्ड एब्यूज करने का अवसर प्रदान करने जैसा है।

इस बारे में पढ़कर अगर आप सोच रहे हैं कि बच्चों को इस बारे में कैसे समझाया जाए तो सब्बसे जरूरी बात जो आपको समझने की जरुरत है वो है बच्चों की मानसिकता। इस बात का इंतज़ार किये बिना कि बच्चा खुद आपके पास अपने किसी सहपाठी, पडोसी या किसी और जान-पहचान वाले की शिकायत लेकर आये बच्चे को घर पर समझाना शुरू करें कि उन्हें असहज कर देने वाली हर हरकत चाहे वो किसी द्वारा भी की जा रही हो को आपके साथ सांझा जरूर करें। ध्यान रखें की बच्चे आपसे सहजता से बात कर सकें उसके लिए आपको उनकी मनोवृति समझना और अपने गुस्से और बेवजह की डाँट-फटकार पर काबू रखना भी जरूरी है।

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