ईराक़ का ये शहर है तहज़ीब की मिसाल

November 18, 2018 by No Comments

बग़दाद : इराक की राजधानी बगदाद का अपना एतिहासिक महत्व है। यह मोसोपोटामिया सभ्यता का केन्द्र रहा है, जो विश्व की प्राचीन सभ्यताऔं मे गिनी जाती है। इस शहर का इतिहास लगभग चार हज़ार साल पुराना है। आज भले ही इराक का नाम आते ही सददाम हुसैन का नाम याद आता हो या फिर खाड़ी युद्ध जिसमें इराक ने अमेरिका और पश्चिमी देशों से सीधे टक्कर ली थी ।लेकिन इस शहर ने उरूज औ ज़वाल के कई दौर देखे हैं। इस्लाम का उरुज भी देखा है और हलाकू खान के हाथों अपनी बरबादी भी।

अगर बात इसके मध्य कालीन इतिहास की करें तो सातवीं सदी मे इसलाम की स्थापना हो गयी थी।इस के बाद ईरान और अरबों मे काफ़ी टकराव रहा।लेकिन आखिरकार इराक पर अरब के खलीफाओं की हुकूमत कायम हो गई, इराक के पुराने नगर नष्ट हो चुके थे और एक नये इराक का उदय हुआ। अरबों की हुकूमत मे जिन कई नए शहरों का विकास हुआ उनमें कूफ़ा (638 ई.), बसरा और दजला के तट पर बगदाद (सन् 762ई.) के नाम प्रमुख है। मुसलमानों मे चार खुलफ़ा ए राशिदीन हुए है। हज़रत अबु बक्र सिद्दीक़ ( रज़ि) हज़रत उमर ( रज़ि) हज़रत उस्मान (रज़ि) और हज़रत अली ( रज़ि)। इनमें से चोथे ख़लीफ़ा हजरत अली ने कूफ़ा को अपनी राजधानी बनाया। उनके बाद आने वाले अब्बासी खलीफाओं ने बगदाद को अरब साम्राज्य की राजधानी बनाया।

10वीं सदी आते आते इस शहर ने बहुत तरक़्क़ी कर ली थी। इस समय बग़दाद एक गोल शहर हुआ करता था । अब्बासी ख़लीफ़ाओं के दौर मे यह शहर दुनिया के तहज़ीबी निज़ाम का गढ़ था।अपने चरम पर अब्बासियों ने ईरानी तत्वों को समावेश किया और उनके काल में इस्लामी विज्ञान, कला तथा ज्योतिष में काफ़ी नए विकास हुए। खलीफा हारुन रशीद के ज़माने मे बगदाद ज्ञान विज्ञान, कला कौशल, सभ्यता और संस्कृति का एक महान केंद्र बन गया था। तेरहवीं सदी में, हलाकू खान के नेतृत्व में मंगोलों ने बगदाद पर आक्रमण किया ।इस युद्ध मे हलाकू खान विजयी हुआ। उसने सभ्यता और संस्कृति के उस महान केंद्र को तहस नहस कर के लाशों से पाट दिया था। वर्तमान समय मे सददाम हुसैन के दौर के बाद यह शहर फिर से ख़ुद को संवारने मे लगा हुआ है।

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