अपने ख़िलाफ़ मुक़दमा हटाये जाने के लिए CM योगी ने दिया आदेश

December 27, 2017 by No Comments

लखनऊ: एक तरफ़ तो उत्तर प्रदेश सरकार संघठित अपराध रोकने के लिए यूपीकोका जैसे बिल को लाती है तो दूसरी तरफ़ क़ानून के काम में कुछ दख़ल भी देती है.इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश सरकार ने 1995 के एक केस में आदेश दिया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, शिव प्रताप शुक्ला और शीतल पांडे समेत दस अन्य लोगों पर लगे मुक़दमों को वापिस ले लिया जाए.

ये केस, पीपीगंज थाने में दर्ज है जो कि गोरखपुर ज़िले में है. मामला लोकल कोर्ट में चल रहा है और कोर्ट में आरोपियों के पेश ना होने पर कई बार इसको लेकर ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी करने का आदेश भी दिया जा चुका है. इस बारे में प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर बीडी मिश्रा कहते हैं कि अदालत ने ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी करने का आदेश दिया था लेकिन उस वक़्त वारंट नहीं जारी किये गए थे.

राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गोरखपुर के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को एक ख़त लिख कर कहा है कि ये मुक़दमें वापिस लिए जाएँ. गोरखपुर के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट रजनीश चन्द्र इस तरह के आदेश के मिलने की पुष्टि करते हुए कहते हैं कि प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर से कहा गया है कि वो केस वापिस लेने की एप्लीकेशन डाले. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार से मिले ख़त में केन्द्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ला, विधायक शीतल पांडे का भी नाम है. पीपीगंज पुलिस स्टेशन के रिकॉर्ड के मुताबिक़ IPC की धारा 188 के तहत इन पर मुक़दमा किया गया था. 27 मई, 1995 को आदित्यनाथ और 14 अन्य लोगों ने सरकार के निषेधात्मक आदेश के बावजूद मीटिंग की थी.हालाँकि इस मामले में आरोपी शिव प्रताप शुक्ला कहते हैं कि उन्हें याद नहीं कि ऐसी कोई मीटिंग हुई थी.

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