2012 में एग्ज़िट पोल को ग़लत साबित करके जीती थी कांग्रेस

शिमला: बिलासपुर से मंडी के रास्ते पर अगर जायेंगे तो मालूम पड़ जाएगा कि एक ओर खायी है और दूसरी ओर चुनाव की गहमागहमी. ऊपर के क्षेत्रों में भी चुनाव प्रचार ज़ोरों पर है. कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही पूरी तैयारी कर ली है और ज़ोर-शोर से इलेक्शन का प्रचार चल रहा है. जहां कांग्रेस दावा कर रही है कि इस बार भी विधानसभा चुनाव वही जीतेगी वहीँ भाजपा का दावा है कि जीत तो उसी की होगी.

इसमें कोई दो राय नहीं कि राज्य में सबसे पोपुलर नेता अभी भी मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ही हैं लेकिन पांच साल सरकार चलाने पर जनता की नाराज़गी तो कुछ झेलनी ही पड़ती है. इसको देखते हुए कांग्रेस में थोड़ा सा डर भी है वहीँ भाजपा भी इस बात से परेशान है कि अंदरूनी खींचतान कहीं पार्टी को ले ना डूबे.

अगर बात पिछले विधानसभा चुनावों की करें तो पिछले चुनाव में कांग्रेस ने लगभग सभी एग्ज़िट पोल्स को ग़लत साबित करके जीत हासिल की थी. एग्ज़िट पोल्स जहां ये दावा कर रहे थे कि भाजपा 40 से अधिक सीटें जीतकर सरकार बनाएगी वहीँ कांग्रेस ने भाजपा को असली नतीजों में पटखनी दे दी.

पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 36 सीटें जीतकर बहुमत प्राप्ति की थी जबकि भाजपा 26 सीटें ही जीत सकी थी. इस जीत के पीछे वीरभद्र सिंह का योगदान माना जाता है. इस बार भी कांग्रेस ने अपने मुख्यमंत्री को फ्री-हैण्ड दे रखा है. बताया जा रहा है कि लगभग सभी सीटों पर वीरभद्र सिंह के कहने के मुताबिक़ ही टिकट बांटे जा रहे हैं. वहीँ दूसरी ओर भाजपा में जेपी नड्डा और प्रेम कुमार धूमल के समर्थक आपस में ख़ुश नहीं हैं. धूमल के समर्थक इस बात से भी नाराज़ हैं कि पार्टी ने उन्हें सुजानपुर की मुश्किल सीट दे दी है जबकि वो हमीरपुर से चुनाव लड़ते और जीतते आये हैं. इसके अतिरिक्त भाजपा को एग्ज़िट पोल्स से भी हौसला मिल रहा है. कुछ एग्ज़िट पोल ऐसा अनुमान लगा रहे हैं कि भाजपा जीतेगी लेकिन एग्ज़िट पोल पर भरोसा करना भाजपा के लिए ही मुश्किल खड़ी कर सकता है.

अब ये देखने वाली बात होगी कि किसकी रणनीति कामयाब होती है लेकिन मुक़ाबला तो कांटे का ही है.

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