उत्तर प्रदेश में जंगल राज? एप्पल में काम करने वाला भी नहीं है सेफ़, विवेक तिवारी मामला….

September 29, 2018 by No Comments

नई दिल्ली/लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस द्वारा एप्पल के एरिया मैनेजर की कथित हत्-या का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. विवेक तिवारी एप्पल में काम करते थे और कंपनी के प्रोग्राम के बाद रात को दो बजे वो घर लौट रहे थे. उनके साथ में एक महिला भी साथ थी लेकिन पुलिस कांस्टेबल ने उन पर गोली चला दी. इस मामले में आरोपी कांस्टेबल पर हत्-या का मुक़दमा दर्ज किया गया है।

अब इस हत्याकांड को लेकर सोशल मीडिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। युवा पत्रकार कृष्णकांत ने इस कांड पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि अगर पहले के मुठभेड़ पर सवाल खड़े कर दिये गए होते तो आज विवेक तिवारी जिंदा होता। उन्होंने लिखा कि एनकाउंटर से अपराध नहीं खत्म होता, कानून खत्म होता है।

उन्होंने कहा,”अभी-अभी अलीगढ़ एनकाउंटर पर ख़बर आई थी कि वह प्रायोजित था। मीडिया को बुलाकर शूटिंग करवाई गई। यानी कि पुलिस ने मजबूरी में गोली नहीं चलाई। पहले से योजना बनाई, मीडिया बुलाया और एनकाउंटर किया। लेकिन उस पर चुप्पी छाई रही। हर एनकाउंटर पर मीडिया पुलिस और जनता मिलकर जश्न मना रही थी। मानवाधिकार आयोग और अन्य संस्थाओं ने आपत्ति दर्ज कराई लेकिन हम आप जश्न मना रहे थे कि अपराध खत्म हो रहा है।”

वो आगे लिखते हैं,”मीडिया और जनता की चुप्पी ने पुलिस को यह भरोसा दिया कि उसे सरंक्षण है। वह जिसे चाहे गोली मार सकती है। अब एक ताकतवर आदमी पर वही गोली चली है। अब सभी को लग रहा है कि यह तो बुरा हो रहा है। वाकई बुरा है। वे जो सैकड़ों एनकाउंटर हुए, वे अपराधियों का नहीं, कानून और नागरिक अधिकारों की हत्या थी। एनकाउंटर से अपराध का संस्थानीकरण होता है।”

उन्होंने सवाल किया कि किस कानून में लिखा है कि जिस पर 10-5 मुकदमे दर्ज होंगे, उसे पुलिस गोली मार देगी? पुलिस को मजबूरी में या आत्मरक्षा में गोली चलाने की अनुमति है। इसे पुलिस कार्रवाई का पहला हथियार बना लिया गया। पहले के फ़र्ज़ी एनकाउंटर पर सवाल उठे होते तो आज विवेक तिवारी मारे नहीं जाते।

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