रूसी शहर मास्को में कुरान का जिंदा मुआज्जाह, हज़ारों मुसलमान अपने दीन की सच्चाई आँखों से देखकर रोने लगे

December 12, 2018 by No Comments

कुराने पाक रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम को अता करना एक ऐसा जिंदा मौजिजा है जिसके कमालात का ज़हूर न सिर्फ माज़ी में देखा गया है बल्कि हाल में भी इसके मोजिज़ात देखे गए हैं।और मुस्तकबिल में भी होते रहेंगे। यह इंसानियत की तरफ अल्लाह ताला का भेजा गया आखरी पैगाम था। और अल्लाह ने कुरान में फ़रमा दिया है कि बेशक यह कुरान मैंने उतारा है और मैं ही इसका मुहाफिज हूं.
अल्लाह पाक का किया गया यह वादा किस तरह सच्चा साबित हुआ है और हम आपको बताने जा रहे हैं फिर दूसरे शहर मॉस्को में जहां कम्युनिज्म का दौरा है जहां मजहब को इंसान की जिंदगी से बेदखल कर दिया गया है वहां पर क़ुरआने करीम का क्या जिंदा मोजिज़ा सामने आया उसको हजारों लोगों ने वहां पर देखा जिसने भी देखा उसकी आंखों में आंसू आ गए मगर मीडिया ने इसे कभी भी दिखाया नहीं इसे छुपा दिया गया। यह बात है 1973 की जब रूस में कम्युनिस्ट के सिवा कुछ नहीं था कम्युनिज्म का मतलब होता है कि इस दुनिया का कोई खुदा नहीं है।

youtube


जब खुदा के वजूद से ही इंकार कर दिया गया तब अल्लाह की तरफ से भेजे गए पैगंबर और किताबों को भी गलत करार दिया। यह उन दिनों की बात है जब रशिया में मजहब पर पाबंदी लगी। ऐसे शख्स माहौल में हमारे दोस्त मॉस्को में ट्रेनिंग के लिए चले गए। उन्होंने बताया कि जुम्मा के दिन मैंने अपने दोस्तों से कहा चलो जुम्मा की नमाज पढ़ने चलते हैं सब उनके दोस्तों ने बताया कि यहां की मस्जिदों को गोदाम बना दिया गया है।
सिर्फ 2 मस्जिदें हैं जो सभी बंद और कभी खुली रहते हैं मैंने कहा आप सब मुझे मस्जिद का पता बता दीजिए मैं खुद चला जाऊंगा। जब मैं वहां पहुंचा तो मस्जिद बंद थी मस्जिद के पड़ोस में ही एक बंदे के पास मस्जिद की चाबी थी मैंने उससे कहां की मस्जिद का दरवाजा खोल दो मुझे जुम्मा की नमाज पढ़ना है। उस बंदे ने मुझसे कहा कि दरवाजा तो मैं खोल दूंगा लेकिन उसके बाद अगर तुम को कोई नुकसान हुआ तो उसके जिम्मेदार तुम खुद होगे।

youtube


मैंने उस बंदे को जवाब दिया कि देखिए जनाब मैं पाकिस्तान में भी एक मुसलमान था और यहां भी एक मुसलमान ही हूं। मैं नमाज नहीं छोड़ सकता हूं चाहे कहीं भी रहूं। यह सब सुनकर उस बंदे ने मस्जिद का दरवाजा खोल दिया। मस्जिद के अंदर का माहौल बहुत खराब था मैंने जल्दी-जल्दी मस्जिद की सफाई की और मस्जिद के अंदर के हालात को ठीक करने की कोशिश की। सफाई करने के बाद मैंने बुलंद आवाज में अजान दी।
अजान देने के बाद मैंने देखा कि वहां के बूढ़े बच्चे औरतें सभी मस्जिद के बाहर इकट्ठा हो गए यह कौन है जो अजान दे रहा है। कौन है जो अपनी मौत को दावत दे रहा है। लेकिन डर के मारे कोई भी मस्जिद के अंदर नहीं आया क्योंकि कोई भी यह नहीं चाहता था कि कहीं उनके अंदर जाने पर रशिया की पुलिस उन्हें भी सजा ना सुना दे। जब मस्जिद के अंदर कोई भी नहीं आया और मैं अकेला था तब मैंने जुम्मा की नमाज ना पढ़ कर सिर्फ जोहर की नमाज पढ़ी और मस्जिद के बाहर आ गया।

youtube


जब मैं मस्जिद के बाहर ताला लगाकर ही जाने लगा सब लोग मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे मैंने नमाज नहीं पढ़ी बल्कि दुनिया का कोई बड़ा गुनाह कर दिया हो ।फिर जब मैं वहां से गुजर रहा था तब एक बच्चा मेरे पास आया। और कहने लगा कि आप हमारे घर चाय पीने के लिए आइए पहले तो मैंने उसे इनकार कर दिया लेकिन उसमें ऐसे कहा कि बाद में मैं मना नहीं कर सका।
जब मैं उसके साथ उसके घर में चला गया तब मैंने देखा कि उसके घर में तरह तरह के पकवान रखे थे और मेरे आने पर सब बहुत खुश दिखाई दे रहे थे। मैंने उस घर में खाना खाया चाय पी सब मेरे साथ में एक बच्चा बैठा हुआ था उससे पूछा कि बेटा क्या तुम्हें कुरान पढ़ना आता है? बच्चे ने कहा जी बिल्कुल आता है। तब मैंने जेब से कुराने पाक का छोटा नुस्खा निकाला और बच्चे से कहा कि लो और यह पढ़ कर सुनाओ.

youtube


बच्चे ने मुझे ध्यान से देखा और फिर कुरान को देखा फिर अपने मां बाप को देखने लगा मुझे लगा कि लगता है इस बच्चे को कुरान पढ़ना नहीं आता है। लेकिन वह बच्चा रशिया के कानून से घबरा रहा था क्योंकि वहां पर किसी मजहब या किताब को मानना गलत था इसलिए वह बार-बार अपने मां बाप की तरफ देख रहा था मैंने जब कुरान की एक आयत पर अपनी उंगली रखें यह देखो तो वह बच्चा फर फर कुरान पढ़ने लगा।
यहां तक कि वह बच्चा कुरान की तरफ देखे बगैर भी पता चला गया। मुझे यह देख कर झटका लगा कि वह बच्चा तो कुरान को देखे बिना ही पड़ रहा है मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसके मां बाप से पूछा कि हज़रत यह मामला क्या है उसके मां-बाप ने बताया कि हमारे यहां कुरान नहीं है यहां तक कि अगर किसी के घर से कुराने पाक का एक टुकड़ा भी मिल जाए तो उसे फांसी दे दी जाती है.

youtube


यही वजह है कि हम कुरान अपने घर में नहीं रखते हैं तब मैंने पूछा फिर इस बच्चे को बिना देखे कुरान कैसे याद है उसके मां-बाप ने बताया कि हमारे पास कुराने पाक के कई हाफिज है कोई दर्जी का काम करता है कोई दुकानदार है कोई सब्जी बेचता है तो कोई किसान है हम अपने बच्चों को मजदूरी के बहाने उनके पास भेज देते हैं और वह हमारे बच्चों को कुरान पढ़ना सिखा देते हैं मुंह जबानी। और एक वक्त ऐसा आता है कि यह बच्चे हाफिज बन जाते हैं अब क्योंकि किसी के पास कुरान े नहीं है इसलिए हमारे बच्चे कुरान देखकर नहीं पड़ते हैं बल्कि जवानी पढ़ते हैं हमारे गली मोहल्ले में जितने भी बच्चे आपको दिखाई देंगे उसमें से ज्यादातर बच्चे हाफिज है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *