महिला के पास राइट ऑफ प्राइवेसी है, उसकी मर्जी के बगैर कोई छू भी नहीं सकता: दिल्ली हाई कोर्ट

January 21, 2018 by No Comments

नई दिल्ली: महिला यौन शोषण मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बहुत ही अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि किसी महिला को उसकी मर्जी के बगैर कोई छू भी नहीं सकता। ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि महिलाएं गलत मानसिकता वाले शख्स की विक्टिम बन जाती हैं। कोर्ट ने 9 साल की बच्ची के सेक्शुअली हैरेसमेंट के लिए जज सीमा मैनी ने छविराम नामक दोषी को 5 साल की सजा सुनाई है।

दरअसल साल 2014 में दोषी ने दिल्ली के मुखर्जी नगर के भीड़भाड़ वाले इलाके में बच्ची को गलत तरीके से छुआ था। कोर्ट ने छविराम पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इसके अलावा कोर्ट ने दिल्ली स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी से भी बच्ची को 50 हजार रु. देने का ऑर्डर दिया है।
इस मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि देश के लिए ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसी गंदी मानसिकता वाले पुरुषों द्वारा लड़कियों को परेशान करने का सिलसिला अब भी जारी है। किसी महिला का राइट ऑफ प्राइवेसी पुरुष तय नहीं कर सकता। वे फायदा उठाने या अपनी भावनाओं को तुष्ट करने से पहले दो बार नहीं सोचते।

महिला की मर्जी के बिना कोई उसके शरीर को छू नहीं सकता चाहे मकसद कुछ भी हो। ऐसे गलत मानसिकता वाले लोगों को हैरेसमेंट से मजबूती मिलती है। कोर्ट का कहना है कि ये लोग महिलाओं और बच्चियों के प्राइवेसी राइट को नहीं समझते। भारत जैसे देश में महिलाओं के साथ पब्लिक प्लेस, भीड़भाड़ वाली जगह, बस या बाजार में सेक्शुअल हैरेसमेंट हो रहा है।

आपको बता दें कि दोषी घोषित किए गए जा चुके छवि राम ने 25 सितंबर 2014 को उत्तरी दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में एक भीड़ भाड़ वाले बाजार में नाबालिग को गलत ढंग से छुआ था। जिस बारे में विक्टिम ने उसी वक़्त अपनी मां को इस बारे में बताया। मां ने लोगों की मदद से उसे पकड़ लिया था।

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