बिहार में इतनी सीटों पर अकेले दम पर प्रभावी हैं मुसलमान, ये पार्टी है..

October 30, 2018 by No Comments

लोकसभा चुनाव की विशेष सीरीज़ में एक बार फिर हम आपका स्वागत करते हैं. इस सीरीज़ में हम आपको लोकसभा चुनाव से जुड़े अलग-अलग समीकरणों के बारे में बता रहे हैं. इसी सिलसिले में हम आज आपको बताने जा रहे हैं बिहार के समीकरणों के बारे में. आज हम चर्चा करेंगे कि राज्य के मुस्लिम वोटर कितनी सीटों पर प्रभावित होते हैं और कौन सी पार्टियाँ उनकी पसंद की रही हैं. बिहार में लोकसभा की कुल 40 सीटें हैं. बिहार की आबादी में 17% के क़रीब मुसलमान हैं. मुस्लिम समाज बढ़-चढ़ कर चुनाव में हिस्सेदारी लेता है और लोकतंत्र के पर्व का जश्न मनाता है. मुस्लिम समाज अगर एक जुट होकर वोट करे तो वो बिहार में 8 सीटों पर प्रभावी होता है जबकि उसे अगर कुछ अन्य कम्युनिटी का साथ मिले तो प्रभाव बढ़ जाता है. बिहार में यादव आबादी 14% है, अगर यादव और मुस्लिम एकजुट होकर वोट करें तो ये 13 सीटों पर प्रभावी होते हैं.

फ़िलहाल देखा जाए तो 2014 के लोकसभा चुनाव में 4 मुस्लिम नेता चुनाव जीत कर आये थे. बिहार में मुस्लिम समाज की पसंदीदा पार्टी राजद को माना जाता है जबकि उसके बाद जदयू का नाम आता है. जदयू और राजद के अलावा लोक जनशक्ति पार्टी, कांग्रेस और एनसीपी को भी वोट मिलते रहे हैं. बिहार की राजनीति में लगातार मुस्लिम समाज का दख़ल रहा है. बिहार विधानसभा की 243 सीटों में से 24 सीटों पर मुसलमान विधायक हैं. इसमें से राजद के 12 विधायक हैं, राजद ने कुल 16 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिए थे जबकि जदयू ने महागठबंधन के साथ चुनाव लड़ते हुए 7 मुसलमानों को चुनाव लड़ाया था जिसमें से 5 विजयी हुए थे.

मुस्लिम वोटर्स (फ़ाइल फ़ोटो)


कांग्रेस पार्टी ने 10 मुसलमानों को टिकट दिए थे और इसमें से 6 विधायक चुने गए, एक मुस्लिम विधायक सीपीआई(एम् एल) का भी है.इस आधार पर ये समझना आसान है कि मुस्लिम समाज किस तरह से बिहार की राजनीति में प्रभावी है. कई ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ मुस्लिम आबादी बड़ा प्रभाव डालती है. भाजपा और जदयू अब साथ हैं तो ऐसा माना जा रहा है कि मुस्लिम समाज जदयू से कट जाएगा. पहले की तुलना में अगर और कम वोट जदयू को मुस्लिम समाज का मिलता है तो आने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा-जदयू के लिए मुश्किल होगा.

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