लोकसभा चुनाव विशेष: UP में यादव समाज की पसंदीदा पार्टी है..

October 27, 2018 by No Comments

विशेष: उत्तर प्रदेश के बारे में कहा जाता है कि दिल्ली की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुज़रता है. उत्तर प्रदेश में कई धर्म और जाति के लोग हैं और उनके अपने-अपने नेता हैं. ये एक ऐसा राज्य है जो राजनीतिक तौर पर बहुत मज़बूत भी है और समझदार भी. यहाँ की जनता देश की सियासत अच्छी तरह समझती है. लोकसभा चुनाव की सीरीज़ में हम जातिगत आँकड़े पेश कर रहे हैं और देखेंगे कि इस आधार पर कौन सी जाति किस तरह से चुनाव को प्रभावित कर सकती है. आज हम बात करेंगे यादव समाज की. उत्तर प्रदेश में यादव समाज की आबादी लगभग 11% है. कुछ आँकड़ों में इसे 9-10 प्रतिशत तक भी बताया गया है तो कुछ में 11-12% तक. यादव समाज को अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल किया जाता है. अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल होने वाली कुछ और जातियाँ लोधी, कुर्मी, मौर्या हैं और अन्य हैं. अन्य पिछड़ा वर्ग की 42-45% कुल आबादी है, इसमें सबसे बड़ी संख्या यादव समाज की ही है.

अखिलेश यादव (फ़ाइल)


उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटें हैं जबकि विधानसभा की 403. ऐसे में अगर एक रफ़ अंदाज़ा लगाएँ तो यादव समाज अपने बल पर 9 सीटें जिता सकता है लेकिन उसे अगर मुस्लिम समुदाय का साथ मिले जोकि तक़रीबन 17-18% है तो सीटों की संख्या बढ़ कर 23 हो जाती है. कुछ और जातियों का सहयोग मिलने पर ये आँकड़ा और बढ़ जाता है. देखा जाए तो यादव और मुस्लिम कॉम्बिनेशन का साथ समाजवादी पार्टी को कई बार सत्ता तक लाया है. मुस्लिम समुदाय की प्रदेश में सबसे पसंदीदा पार्टी समाजवादी ही रही है और यादव समाज के लिए भी यही बात कही जा सकती है.

सपा का विरोध करने वाले नेता तो यहाँ तक कहते हैं कि ये यादव और मुस्लिम के लिए ही काम करती है. हालाँकि 2014 के लोकसभा चुनाव में यादव समाज ने भाजपा को वोट दिया था. ‘हिन्दू एकता’ के नाम पर अन्य पिछड़ा वर्ग भाजपा के ख़ाते में गया था.आने वाले लोकसभा चुनाव में ऐसा होते नहीं दिख रहा है. यादव समाज एक बार फिर सपा की ओर लौट रहा है. हालाँकि सपा को नुक़सान तब होगा जब शिवपाल यादव प्रभावी होंगे. कुल मिलाकर इस बात में कोई दो राय नहीं कि यादव समाज उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक मुख्य स्थान रखता है.

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