सनी देओल के पक्ष में वोट माँगते हुए धर्मेन्द्र ने कर दी कांग्रेस नेता की तारीफ़,’सनी डिबेट नहीं कर सकता…’ में कही बड़ी बात

सियासत एक ऐसी चीज़ है जिसमें कई बार भाई-भाई सामने होते हैं. कुछ इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है पंजाब की एक सीट पर. यूँ तो ये सगे भाई नहीं हैं लेकिन दोनों के बीच जो रिश्ता है वो कुछ इसी तरह का माना जाता है. बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल ने हाल ही में भाजपा ज्वाइन कर ली और भाजपा ने उन्हें गुरदासपुर लोकसभा सीट से उम्मीद’वार बना दिया. सनी देओल अपने फ़िल्मी करियर में राजनीति वग़ैरा से दूर रहने वाले व्यक्ति माने जाते रहे हैं.

सनी देओल के पिता धर्मेन्द्र अपने बेटे के राजनीति में आने के बाद उनके पक्ष में प्रचार कर रहे हैं. धर्मेन्द्र को लेकिन जब ये पता चल कि उनके बेटे को वरिष्ठ कांग्रेस नेता बलराम जाखड़ के पुत्र और क़द्दावर कांग्रेसी नेता सुनील जाखड़ के ख़िलाफ़ प्रत्याशी बनाया गया है तो उन्होंने कुछ इस तरह का बयान दिया. उन्होंने कहा,”मुझे गुरदासपुर जाकर पता चला कि सनी बलराम जाखड़ के बेटे सुनील के खिलाफ चुनाव ल’ड़ रहा है। बलराम जाखड़ से मेरे काफी अच्छे रिश्ते थे।”

धर्मेन्द्र ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि 2004 आम चुनाव में राजस्थान के चुरू से बलराम जाखड़ के खिलाफ चुनाव ल’ड़ने से उन्होंने इनकार कर दिया था। इसके बाद, धर्मेंद्र को बीकानेर से उतारा गया, जहां से वह विजयी हुए थे।उन्होंने आगे कहा,”किस्मत हमें गुरदासपुर लाई है। यहां आकर मैंने पूछा कि क्या बलराम जाखड़ का बेटा सनी के खिलाफ चुनाव ल’ड़ रहा है। मुझे बताया गया कि ऐसा ही है। शायद मैं ना कह देता अगर यह पहले पता होता कि सुनील यहां से चुनाव ल’ड़ रहा है। हालांकि, अब हम मैदान में हैं और कुछ भी बदला नहीं जा सकता।”

धर्मेन्द्र दावा करते हैं कि उन्हें सांसद और विधायक के बीच का फ़र्क भी नहीं मालूम था लेकिन इस तरह का ज्ञान उन्हें बलराम जाखड़ से ही मिला. वो कहते हैं,”बलराम जाखड़ ने मुझे राजनीति का शुरुआती ज्ञान दिया।’ धर्मेंद्र ने बताया कि उन्होंने बलराम जाखड़ के लिए राजस्थान में प्रचार किया।” उन्होंने कहा, ‘अब हम गुरदासपुर में हैं और हम उस ल’ड़ाई को ल’ड़ेंगे जिसकी जिम्मेदारी हमें दी गई है। मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि प्रचार के दौरान किए गए सभी वादे पूरे किए जाएं।

कांग्रेस प्रत्याशी सुनील जाखड़ ने सनी को चुनौती दी कि वो स्थानीय मुद्दों पर बहस करें. जब ये बात धर्मेन्द्र को पता चली तो उन्होंने कहा,”सनी डिबेट नहीं कर सकता। सुनील को अनुभव है और उसके पिता भी राजनेता थे। हम फिल्म इंडस्ट्री से हैं। हम यहां डिबेट करने नहीं आए हैं। हम यहां लोगों की समस्याएं सुनने आए हैं।” उन्होंने आगे कहा,”मैंने सनी से कहा कि राजनीति बेहद मुश्किल चीज है लेकिन उसने बताया कि उसने पहले ही चुनाव ल’ड़ने के लिए हां कर दी है। मुझे नहीं पता कि उसे किसने राजी किया, लेकिन अब उसने हामी भर दी है। हम मैदान छोड़कर नहीं भागेंगे।”

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