दक्षिण भारत के साथ लगातार होता है भेदभाव, DMK नेता ने दिया बड़ा बयान

March 19, 2018 by No Comments

दक्षिण भारत में अपनी मज़बूत पकड़ रखने वाली राजनीतिक पार्टियां फिलहाल केंद्र सरकार से नाराज़ हैं। तमिल नाडु की DMK भी भाजपा से नाराज़ है और आंध्र प्रदेश की TDP भी। इस बीच DMK के वर्किंग प्रेजिडेंट एमके स्टॅलिन ने एक ऐसा बयान दिया है जिसके बाद पूरे दक्षिण भारत में सियासत गर्म हो गयी है।

असल में उन्होंने एक पत्रकार द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि अगर कोई दक्षिण भारत को अलग देश बनाने की मांग करता है तो वो इसका समर्थन करेंगे। स्टॅलिन के इस बयान के बड़े राजनीतिक मायने हैं। दक्षिण भारत की सबसे बड़ी पार्टियों में से एक मानी जाने वाली पार्टी की ओर से आया ये बयान भाजपा के लिए मुसीबत भरा है।

इसके पहले भी इस तरह की मांग DMK उठा चुकी है लेकिन बाद में पार्टी ने ये एजेंडा छोड़ दिया। अब जबकि दुबारा पार्टी ऐसी बात कर रही है तो इसका मतलब ये भी है कि DMK अब दक्षिण और उत्तर की राजनीति करने की कोशिश में है। दक्षिण के नेता ये कहते रहे हैं कि सबसे ज़्यादा राजस्व तो दक्षिण से दिया जाता है लेकिन केंद्र सरकार काम उत्तर भारत के राज्यों के लिए करती है।

इससे पहले भी डीएमके के कार्यकारी अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने दावा किया कि आगामी 6 महीने के भीतर राज्य में डीएमके की सरकार होगी और अगले 25 सालों तक जारी रहेगी। गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर टीडीपी संसद में एनडीए की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला रही है। टीडीपी पहले एनडीए में शामिल थी, लेकिन इस मुद्दे को लेकर अब वह गठबंधन से अलग हो चुकी है।

इस दौरान स्टालिन ने एआईएडीएमके के नेता और तमिनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीसामी को खत लिखकर कहा है कि उन्हें टीडीपी (तेलुगू देशम पार्टी) के अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करना चाहिए।

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