डॉ कफ़ील, एक ऐसा हीरो जिसे विलन बनाने की नाकामयाब कोशिश की गयी…

November 26, 2017 by No Comments

आजकल वो दौर है कि अगर कोई अच्छा काम करे तो उसे लोग बेवक़ूफ़ समझते हैं. ये एक ऐसा दौर है जिसमें हादसे के बाद कोई इंसान सड़कों पर चीख़ चीख़ कर मदद मांग रहा होता है लेकिन लोग बजाय उसकी मदद करने के वीडियो लेने में लगे रहते हैं. ये कहना ग़लत नहीं होगा कि इस दुनिया में अब बुराई का बोलबाला है और इस बुरे दौर में अगर कोई इंसान लोगों की मदद करने की कोशिश करता है तो उसके साथ क्या होता है इसका ताज़ा-ताज़ा उदाहरण हैं डॉ कफ़ील अहमद ख़ान. गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के वरिष्ट चिकित्सक डॉ कफ़ील उस वक़्त ख़बरों में आये जब अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी होने की वजह से बच्चों की मौत हो रही थी. डॉ कफ़ील ने मासूम बच्चों की जान बचाने के लिए ऑक्सीजन सप्लाई ना रुके इसलिए बहुत कोशिशें कीं.

लेकिन एक ईमानदार डॉ को अपनी ईमानदारी का ईनाम तो नहीं मिला लेकिन हाँ, सज़ा मिल गयी. 9 लोगों के साथ उन्हें भी 50 से अधिक बच्चों की मौत के मामले में आरोपी बना दिया गया. इतना ही नहीं दक्षिणपंथी मीडिया उनके ख़िलाफ़ ऐसी बातें करने लगा जो बेबुनियाद थीं लेकिन अफ़वाह बाज़ों के लिए ये भी एक मौक़ा था. ये भी कहा जा सकता है कि ये अफ़वाहें जानबूझकर फैलाई गयी थीं.

इस मामले में पुलिस ने अपनी जांच पूरी कर ली है और जांच में ये पाया है कि डॉ कफ़ील के ख़िलाफ़ जो भी आरोप लग रहे हैं वो बेबुनियाद हैं. इस मामले में इन्वेस्टीगेशन ऑफिसर अभिषेक सिंह कहते हैं डॉ कफ़ील के ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं मिला है. उनके ऊपर प्राइवेट प्रैक्टिस करने के आरोप भी झूठे ही पाए गए.

हमें ये समझना होगा कि डॉ कफ़ील जैसे लोगों का अगर हमने सम्मान करना बंद कर दिया तो लोग अच्छा काम करने से भी डरेंगे. जो कुछ अच्छे लोग भी हैं उन्हें ख़त्म करने की कोशिश ठीक नहीं है.

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