डॉ कफ़ील की वजह से उजागर हो पायी ऑक्सीजन की कमी, क्या इसीलिए उन्हें पद से हटाया गया?

गोरखपुर: बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में जब कोई अपनी ज़िम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहा था तब एक आदमी ये कोशिश कर रहा था कि किसी भी तरह से बच्चों की जान को बचाया जा सके| लेकिन इस आदमी को उसके पद से सरकार ने हटा दिया है|इस आदमी का नाम है डॉ कफ़ील अहमद| डॉ अहमद को हटाने की वजह सरकार कुछ बता नहीं पा रही है सिवाय इसके कि वो अपना प्राइवेट क्लिनिक चलाते हैं लेकिन शायद असल वजह कुछ और है| असल में उनकी वजह से ही ऑक्सीजन की कमी का मामला मीडिया के सामने आया| उनके इलावा डॉ महिमा मित्तल और दूसरे डॉक्टरों ने इस मामले में तत्परता दिखायी और बच्चों की जान बचाने की कोशिश की|

अब उन पर सरकार ने कार्यवाही कर दी है तो कुछ लोग जो सत्ताधारी पार्टी को पसंद करते हैं सोशल मीडिया पर डॉ कफ़ील के ख़िलाफ़ झूठा प्रचार कर रहे हैं| समझने की बात ये है कि जब सरकार बार बार कह रही है कि रिपोर्ट आने का इन्तिज़ार करिए तो रिपोर्ट आने से पहले डॉ कफ़ील पर कायर्वाही का क्या मतलब? स्वस्थ मंत्री से इस्तीफ़ा लिया जाना था जो अब तक नहीं लिया गया|

डॉ कफ़ील ने दिखायी ईमानदारी

अहमद जो कि इन्सेफेलाइटिस वार्ड के इनचार्ज थे, ने 11 अगस्त की रात को जैसे ही फ़ोन पर ये सुना कि अस्पताल में ऑक्सीजन ख़त्म हो रहा है वो दौड़ पड़े|

उन्हें जो सबसे नज़दीक अस्पताल दिखा वहाँ गए और उन्हें वहाँ से तीन सिलिंडर मिले जो उन्होंने सीधे बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज पहुंचाए| इसी तरह से वो कई और अस्पतालों में अगली सुबह तक जाते रहे|

इस तरह उन्होंने 12 ऑक्सीजन सिलिंडर का इन्तिज़ाम कर लिया और जब उन्हें मालूम चला कि एक लोकल सप्लायर इस शर्त पर सिलिंडर देने को तैयार है कि पेमेंट कैश हो तो उन्होंने अपना डेबिट कार्ड एक जूनियर को देकर उसके पास भेजा |

डॉ कफ़ील अहमद अपनी तमाम कोशिशों के बावजूद भी 60 से अधिक बच्चों को मरने से नहीं बचा सके| उनकी इस ईमानदार कोशिश की वजह से लोगों ने उन्हें मसीहा कहना शुरू कर दिया है|

डॉ कफ़ील की ईमानदारी और साहस का नतीजा अगर उनको नौकरी से हटा कर दिया जाएगा तो ये शर्मनाक है| सोशल मीडिया पर भी कफ़ील को हीरो का दर्जा दिया जा रहा है और सरकार के इस बेतुके फ़ैसले की निंदा की जा रही है|