वालेदैन के लिए ताक़तवर दुआ और वजीफा, जिनके वालेदैन वफात पा चुके हैं या जिंदा हैं वो ये बयान लाज़मी सुने

December 11, 2018 by No Comments

अस्सलामुअलैकुम मेरे प्यारे भाइयो और बहनों जब कोई औलाद अपने माँ बाप के गुज़र जाने पर पढ़ती है तो वो उसके माँ बाप को इतना ताकतवर होकर लगेगा जिसका कोई हिसाब नहीं है ।अक्सर लोग किसी की वफ़ात होने पर मदरसे के बच्चों को बुला कर पढ़वाते है उनका पढ़ना गलत नह है लेकिन जी उनकी औलाद पढ़े उसकी ताकत तो औऱ ही होती है.
जब तक माँ बाप ज़िंदा है उनकी सेवा करो,उनका ख्याल रखो ,उनको दुआ दो।और जब उनकी वफर हो जाय तो उनकी क़ब्र पर जाओ ,उनके पास बैठ कर क़ुरान पढो।हमारे यहाँ लोग मदरसों में चले जाते हैं और मदरसे वाले कहते हैं लो जी 100 क़ुरान, लो जी 50 क़ुरान। लोग कहते हैं कि मौली साहब इतने बच्चों को भेज दीजिए कुरान पढ़ाना है अब यह बताइए ना क्या मोदी साहब की मरी है जिन की वफात हुई है उनके बच्चे दूसरे कमरे में बैठकर सिगरेट पीते हैं दोस्तों से बातें करते हैं और मदरसे के बच्चों को बुलाकर कुरान पढ़ पाते हैं.

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एक दिन मौलाना साहब भी बच्चों के साथ किसी के घर कुरान पढ़ने चले गए थोड़ी देर बाद उन्होंने बच्चों पर ध्यान दिया कि यह बच्चे आखिर कर क्या रहे हैं उनके ध्यान देने पर पता चला और बच्चे कुरान नहीं पढ़ रहे हैं बल्कि सामने एक छोटे से रेडियो में बज रहे इंडिया-पाकिस्तान के मैच स्कोर को ध्यान से सुन रहे हैं और जब जिनके घर वफात हुई है उनमें से कोई आकर देखता तो वह जल्दी से कुरान पढ़ना शुरू कर देते थे जैसे ही वह लोग वहां से चले जाते बच्चे फिर से इसको सुनने लगते हैं मैंने 1 घंटे तक के सारे तमाशे को ध्यान से देखा कुछ घंटे के बाद सब ने कहा कि कुरान हो गई जब में कुरान पढ़ ली.
अब आप यह बताइए कि क्या कुरान पढ़ी गई और क्या शबाब मां बाप को मिला क्या मां-बाप को उसके मंत्री का शबाब मिला मौलाना साहब ने कहा कि आज का जमाना इतना खराब हो चुका है कि बच्चे मां बाप के लिए कुरान किराए पर लेने हैं मैं कहता हूं कि मां-बाप जिंदा है तो उनकी दुआएं लोग सेवा करो ख्याल रखो और उनके गुजरने के बाद अगर आप हर हफ्ते उनकी कब्रों पर जा नहीं सकते हैं तो कम से कम साल में एक बार ही सही जाकर उनकी कब्र पर कुरान पढ़ते अगर आप इतना भी नहीं कर सकते हैं तो घर पर ही कुरान पढ़ कर उनके नाम पर बख़्श दे.

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क्योंकि यही हमारे मां-बाप का हक है मां-बाप हमें पैदा करते हैं पालते हैं पूछते हैं हमारी अच्छी से अच्छी परवरिश करते हैं अगर हम उनके लिए इतना भी ना कर सके तो फिर ऐसी औलाद बेकार मां बाप के लिए जितना औलाद का पढ़ना ताकतवर साबित होता है उतना मदरसे के बच्चों का पढ़ना नहीं इब्ने कयूम र.आ.ने एक वाक्य लिखा है की अब्दुल्ला बिन मुत्तरीब ने ख्वाब में देखा कि बहुत सारी क़ब्रे फ़ट रही हैं उनमें से मूर्दे निकल रहे हैं और कोई चीज़ उठा रहे ह।एक आदमी निकल कर आराम से बैठा है.
उन्होंने सवाल किया कि आप सब आंखें हैं तो क्या उठा रहे हैं तब उन्होंने जवाब दिया कि हमारे रिश्तेदारों ने पढ़कर जो शराब भेजा है हम उसे उठा रहे हैं तब उन्होंने उससे पूछा भाई आखिर तुम क्यों नहींसवाब उठा रहे हो तब उन्होंने जवाब दिया यह मेरा बेटा हाफिज ए कुरान है रोज एक कुरान पढ़ कर मुझे भेज देता है मैं छोटे-मोटे नहीं एक साथ बहुत सारे सवाल उठा लेता हूं जब मैंने पूछा कि तुम्हारा बेटा क्या काम करता है.

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तो उन्होंने जवाब दिया मिठाई की दुकान है बाजार में जब सुबह मेरी आंख खुली तो मैं बाजार पहुंचा और मैंने देखा कि बाजार में एक मिठाई की दुकान है और एक बंदा उस पर बैठा हुआ है मैंने देखा वह बंदा मिठाई बेच रहा है और उसके होटल रहे हैं मैंने काफी देर तक उस बंदे को देखा और फिर उसके पास गया मैंने पूछा बेटा तुम्हारा नाम क्या है उसका नाम वही था जो ख्वाब में सुना था.

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मैंने उससे उसके वालिद का नाम पूछा उनका नाम भी वहीं था जो ख्वाब में सुना था मैंने पूछा बेटा तुम यह क्या पढ़ रहे हो उसने कहा कुरान पढ़ रहा हूं मैंने कहा कितनी पढ़ते हैं उसने कहा एक कुरान पढ़ता हूं मैंने कहा रोज एक कुरान पढ़ कर तुम क्या करते हो उसने कहा मैं इसके सारे वाब अपने वालिद को भेज देता हूं मैंने कहा इतनी मेहनत तुम किसके लिए करते हो तब उसने जवाब दिया मेरे वालिद मेरे लिए इतना कुछ कर गए अगर मैं इतना भी उनके लिए ना करूं तो बेकार है यह हमारे मां-बाप का हक है.

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