सदका करने वाली एक सखी औरत की कहानी सुनकर रोना आ जायेगा…देखिये विडियो

दोस्तो कभी कभी छोटी छोटी चीज इंसान को साहेब फजीलत बना देता है। रुपए में एक पैसा अब तो वो पैसा रहा भी नहीं ये एक साहब है किया जखिर अहमद कराची से उन्होंने अपने अखबार के जरिए सच्ची कहानी के उंवान से एक किस्सा बताया वो लिखते है कि मेरे गांव में एक खातून थी मंज़ूर की अम्मा मेरी अम्मा बताती है कि जब जिस वक़्त ये खातून विया के आई थी तब इन घर बहुत गरीबी थी दो वक़्त की रोटी खाना भी मुश्किल हुआ करता था लेकिन इस खातून के आने के बाद से उनके घर के हालात बदलने लगे पूरे गली के लोग इस बात से हैरान थे कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि जो लोग दो वक़्त की रोटी नहीं खा पाते थे.
आज उनके घर से कोई भी गरीब साहिल खाली हाथ नहीं जाता इनकी हद से गुरी हुई मशी और घरेलू हालत के अचानक इतनी तब्दीली आ गई मै जब १० साल की उम्र में तालीम कि गरज से अपने गांव से कलकत्ता आया तो मै एक बार इस खातून के मिया जिनको मै नज़ीर चाचा कहा करता था उनसे मिलने गया उनकी बीड़ी और पान की छोटी सी दुकान थी जब मै वाहा पहुंचा तो दो आदमी बीड़ी बनने में मशगूल थे और नज़ीर चाचा पान बनने और लगाने में लगे हुए थे.

बचपन से मेरी ये आदत रही है कि जब मै कोई बात समझ नहीं पाता तो उसकी टो में लगा रहता हूं नज़ीर चाचा की कलकता शहर में एक ऐसे इलाके में थी जो कोई मशहूर हकीकत नहीं रखता था गांव में इनका घर मेरे पड़ोस में था मिल के बहुत खुश होता जब पहुंचा तो उन्होंने मुझे दुकान में उपर बुला कर बैठाल लिया बातो बातो में मैंने उनसे पूछा कि चाचा बस यही आपकी छोटी सी दुकान है तो उन्होंने कहा कि हां बेटा ऑलहा इसी में खैरोबरकत देता है.

और चाची सब सहिलो को पैसा देती है कोई भी आपके घर से खाली हाथ नहीं जाता है तो उन्होंने मुझे एक टीन का डिब्बा दिखाया और कहा कि बेटा इस डिब्बे को देखी मै जब रात को खाली होता तो सारा हिसाब कर के १ पैसा इस डब्बे में डाल देता हूं और जब ये डिब्बा भर जाता तो इसे तुम्हारे चाची के पास भेजवा देता हूं।। आगे देखें वीडियो में।।

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