देश में रोज़गार का स्तर इतना गिर गया की एक पढ़ा लिखा शख़्स अपने लिए खाना नहीं कमा पा रहा, गलती किसकी ?

January 12, 2018 by No Comments

आज मेरी बात मेरे ऐसे दोस्त से हुई जिससे मिले मुझे काफी समय हो गया, आज जब मैं अपने फ़ोन की फ़ोन बुक देख रहा था तो मुझे उसका फ़ोन नंबर मिला फिर मन हुआ की चलो आज बात कर लेते है, हो भी क्यों ना वो हमारे बैच का सबसे होनहार लड़का हुआ करता था और पूरे स्कूल में सबका प्यारा स्टूडेंट हर चीज़ में सबसे आगे था खेल में, पढाई में, स्कूल के हर कार्यक्रम में वो बेस्ट था।

उसकी बात सुनने के बाद में सोचने लगा हुआ कि- वो गाँव के एक साधारण परिवार से आया लड़का,अपनी दीदी के घर पर रहकर ही उसने पढाई की और स्कूल के टॉपर बच्चो में सब से आगे रहा, वह अपनी लाइफ में बहुत कुछ करना चाहता था आगे और पढना चाहता था, उसने जैसे-तैसे, मेहनत कर B.Tech. में दाख़िला लिया काफी महेनत के बाद अच्छे नंबर से पास हुआ।

लगा वह अपने जीवन में अब बहुत कुछ हासिल कर लेगा अपने घर की आर्थिक तंगियो को दूर कर देगा, उसके घर पर भी लोग उसकी कामयाबी से खुश हुए सोचने लगे की अब हमारा लड़का उनकी हर समस्या को दूर कर देगा, लेकिन शायद यह सब ख्वाब ही था।

वह जहाँ भी जॉब के लिए जाता उसे केवल 7000 से 8000 रुपया की ही जॉब मिल रही थी और अच्छी उम्मीद से एक के बाद एक ऑफिस के चक्कर काटता रहा लेकिन जॉब नहीं मिली, सरकारी नौकरी के लिए भी काफी कोशिश की। लेकिन नौकरियों की दशा तो हर कोई जनता ही है और आज वह कोचिंग में मात्र 10000 रुपए में पढ़ाने को मजबूर है।

हमारे देश में रोजगार का स्तर इतना गिर गया की एक पढ़ा लिखा व्यक्ति भी अपने लिए और अपने परिवार के लिए ठीक से भोजन का इंतजाम नहीं कर पा रहा है जिसकी पढाई के लिए घर वाले पूरी मेहनत से दिन रात काम करके पैसों का इंतजाम करने में अपना पूरा जीवन लगा दिया।

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सौरभ सिंह

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