मुस्लिम देश में आया था संकट, फिर एरदोगन ने लिया ये फ़ैसला

October 10, 2018 by No Comments

पिछले सालों में तुर्की एक ऐसा देश साबित हुआ है जिसने अपने पड़ोस के मामलों में किसी न किसी तरह का दख़ल रक्खा है. अक्सर तुर्की ने अपने क्षेत्र और क्षेत्र के बाहर लोगों की मदद ही की है. एक बार तुर्की ने रजब तैयब एरदोगन के नेतृत्व में अपने क्षेत्र के लोगों की मदद करने के लिए हाथ बढ़ाया है.

पड़ोसी देश ईराक़ में इस समय पानी का संकट है. इस संकट से निजात पाने के लिए ईराक़ लम्बे समय से भटक रहा था लेकिन अब उसे तुर्की का साथ मिल गया है. इस बारे में ईराक़ी संसद के स्पीकर ने बयान दिया है कि एरदोगन दक्षिण-पूर्वी तुर्की में बने एक बाँध से अधिक पानी छोड़ने को राज़ी हो गए हैं.

तुर्की टिगरिस नदी के पानी पर निर्भर करता है. टिगरिस नदी की मदद ससे रिजर्वायर में पानी आता है. ईराक़ ने तुर्की से इल्तिजा की थी कि उसे अधिक शेयर दिया जाए क्यूंकि उसके देश में पानी को लेकर के विशेष क़िस्म का संकट है. ईराक़ में सबसे अधिक संकट की स्थिति दक्षिणी राज्य बसरा में है.

स्पीकर मुहम्मद अल-हल्बुसी ने मंगल के रोज़ एरदोगन से मुलाक़ात की थी. इस मुलाक़ात के बाद ये समझौता हुआ है कि तुर्की अधिक शेयर ईराक़ को देगा. एक बयान में ह्ल्बुसी ने कहा कि ये इसलिए किया गया है ताकि ईराक़ के बसरा समेत सभी प्रान्तों तक पानी पहुंच सके.

आपको बता दें कि ईराक़ में पानी की 70 फ़ीसदी सप्लाई पड़ोसी देशों से आती है. टिगरिस और यूफ्रातेस से ही अधिकतम पानी आता है, ये दोनों नदियाँ तुर्की से गुज़रती हैं. ईराक़ में पानी संकट की स्थिति कितनी भयावह थी वो इसी से समझी जा सकती है कि ईराक़ की सरकार ने चावल की खेती पर पाबंदी लगा दी थी जिसकी वजह से किसानों को अपनी ज़मीन छोड़नी पड़ गयी. बसरा में साफ़ पानी की कमी ने लोगों को सड़कों पर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर कर दिया.

ग़ौरतलब है कि ईराक़ लम्बे समय से युद्ध के माहौल में रहा है. सद्दाम हुसैन के पतन के बाद से लम्बे वक़्त तक वहाँ गृह युद्ध जैसी स्थिति रही. ISIS जैसे आतंकी संघठन ने भी देश पर कुछ समय तक राज किया. अब कुछ स्थिति बेहतर हुई है जिसके बाद से सरकार विकास कार्यों पर ध्यान दे रही है.

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