एरदोगन के राज में तुर्की की करेंसी हो रही है मज़बूत

October 16, 2018 by No Comments

तुर्की: पिछले कुछ महीनों में भारतीय मुद्रा रुपया डॉलर के मुक़ाबले लगातार कमज़ोर हुई है. इसको लेकर भारत सरकार की ओर से कई प्रकार के तर्क दिए जा रहे हैं तो विपक्ष इस मुद्दे पर मोदी सरकार की आलोचना कर रहा है. जहां एक तरफ़ भारतीय रुपया कमज़ोर हो रहा है वहीं तुर्की की मुद्रा लीरा कुछ महीनों की कमज़ोरी के बाद अब मज़बूत हो रही है.

दो महीने के अपने ऊपरी स्तर पर पहुँची लीरा से तुर्की की अर्थव्यवस्था को भारी उम्मीदें आयी हैं. इसकी वजह है कि तुर्की और अमरीका के बीच संबंधों का बेहतर हो जाना. लम्बे समय से दोनों देशों के सम्बन्ध में खटास महसूस की जा रही थी लेकिन पिछले कुछ दिनों में राजनीतिक हालात बेहतर हुए हैं. इसका फ़ायदा तुर्की लीरा को मिला है. सोमवार के रोज़ ये एक डॉलर के मुक़ाबले 5.7757 थी जो कि मध्य-अगस्त के बाद हासिल किया गया उच्चतम लेवल है. बात अगर ब्रिटिश पौंड की करें तो एक पौंड के बदले 7.6080 तुर्की लीरा देने होंगे.

लीरा के मज़बूत होने की वजह अमरीकी पास्टर एंड्रू ब्रुंसों का रिहा होना है. पिछले एक साल में 35% तक तुर्की लीरा गिर गयी थी, ऐसे में सम्बन्ध बेहतर होते ही इसका फ़ायदा नज़र आ रहा है.अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी पास्टर के रिहा होने को बड़ा क़दम बताया. उन्होंने कहा कि हमारे पास मौक़ा है कि हम तुर्की के नज़दीक जाएँ और हम बहुत अच्छा सम्बन्ध बनाएँ.

ग़ौरतलब है कि दिसम्बर 2016 में ब्रुंसों को गिरफ़्तार किया गया था. उनके ऊपर तुर्की की सरकार का तख़्ता पलट करने में गुलेनिस्ट टेरर ग्रुप का साथ देने का आरोप था. अदालत ने उन्हें तीन साल क़ैद की सज़ा सुनाई थी. इस साल जुलाई में उन्हें हाउस-अरेस्ट के लिए भेज दिया गया. अच्छे व्यवहार और सज़ा की मियाद पूरी हो जाने की वजह से उन्हें शुक्रवार को रिहा कर दिया गया.

पास्टर को लेकर तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एरदोगन और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प में ख़ासी तनातनी देखी गयी थी. तुर्की ने अमरीका के आगे न झुकने का फ़ैसला किया था.

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