फिर धोखेबाज़ साबित हुआ अमरीका?, एरदोगन ने…

October 15, 2018 by No Comments

अंकारा। तुर्की एक ऐसा देश है जो एशिया और यूरोप के बीच का पुल कहा जाता है।इसका कुछ भाग एशिया मे है और कुछ यूरोप में । यूरोपीय भाग को थ्रेस कहा जाता है जबकि एशियाई भाग को अनातोलिया कहते हैं। तुर्की भले ही एक छोटा सा देश हो लेकिन इसने विश्व पटल को हमेशा प्रभावित किया है। इसी तुर्की ने हाल ही में सुपर पावर अमेरिका का चुनौती देने का मन बनाया है। दरअस्ल शुक्रवार 12 अकटूबर को तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन ने कुर्दिश बलों के खिलाफ एक सैन्य अभियान की प्रतिबद्धता दोहराई है। इन कुर्दिश बलो को अमेरिका का समर्थन हासिल है । इन कुर्दिश बलो का इस समय सीरिया के पूर्वोत्तर भाग में प्रभुत्व है।

तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा है कि वह जल्द ही यूफ्रेट्स के पूर्व में आतंकवादियों के घोंसले को कुचल देंगे।एर्दोगन ने आगे कहा कि अमेरिका कुर्द बलों को खींचने के अपने वादे को पूरा करने में असफल रहा।उनका कहना है कि मौजूदा वक्त में इंसाफ़ की उम्मीद किसी भी तरह नहीं की जा सकती है।उन्होंने एक अलग भाषण में कहा, कि उन्होंने अपना इरादा नहीं बदला है।

उनके मुताबिक जो कुछ भी ज़रूरी होगा वह हम करेंगे। उल्लेखनीय है कि इस साल तुर्की ने सीपी के अफ्रिन क्षेत्र को वाईपीजी मिलिशिया से जब्त कर लिया था।आप को बता दें कि 2014 से सीरिया और इराक के स्वार्थों में अमेरिका ने वाईपीजी को इस्लामी राज्य के सबसे प्रभावी काउंटर के रूप में समर्थन दिया। अमेरिकी सेनाओं की उपस्थिति से अमेरिका को सीरियाई युद्द मे काफी फायदा हुआ है ।वहीं रूस भी सीरिया मे अपना प्रभुत्व बनाना चाहता है।

तुर्की राष्ट्रपति के भाषण से ज़ाहिर है कि अपने लक्ष्य को आगे पूर्व प्राप्त करने के लिए तुर्की, कुर्दों के साथ तैनात अमेरिकी सेनाओं के साथ सीधे टकराव के लिए भी तैयार है । हालांकि टकराव की शुरुआत एक अमेरिकी पादरी, एंड्रयू ब्रूनसन के मुकदमे के साथ हुई थी जिनको आतंकवाद के आरोपों पर दो साल की कैद हुई थी।

एदोर्गन के एक मुख्य सलाहकार इलूर सेविक ने शुक्रवार को दैनिक अख़बार सबा के एक लेख में लिखा है कि अगर ब्रूनसन का मामला हल हो गया , तो वाशिंगटन के साथ और भी मुद्दे हैं, जिसमें सीरिया में “पीकेके के ऑफशूट” के लिए समर्थन शामिल है ।

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