एक्सक्लूसिव: क्या गुजरात चुनाव कांग्रेस की ओर जा रहा है?; कैसे इस वजह से हुआ बदलाव?

November 4, 2017 by No Comments

पिछले कई चुनाव गुजरात में इस तरह हुए कि ख़ुद कांग्रेस नेता ऐसा नहीं मान पाते थे कि वो संघर्ष में हैं. कुछ बहुत उत्साही नेता ज़रूर ये बात कह देते थे लेकिन वो जानते थे कि स्थिति ऐसी नहीं है लेकिन इस बार के विधानसभा चुनाव बिलकुल अलग हैं. कांग्रेसी नेताओं के चेहरे खिले हुए हैं और भाजपाई नेताओं के चेहरे ऐसे हो गए हैं जैसे कभी कांग्रेस के नेताओं के हुआ करते थे.राज्य में इस तरह की राजनीतिक गहमागहमी बहुत सालों बाद हुई है. वैसे देखा जाए तो चार-पांच महीने पहले कांग्रेस की स्थिति कमज़ोर मानी जा रही थी. पार्टी के क़द्दावर नेता रहे शंकर सिंह वाघेला ने पार्टी का दामन छोड़ दिया और साथ ही कई कांग्रेसी नेता भाजपा में जाने लगे. हालाँकि बात तो तब भी ये थी कि हार्दिक पटेल भाजपा का विरोध अगर तेज़ रखेंगे तो कांग्रेस को कुछ तो फ़ायदा होगा ही लेकिन भाजपा को लगता था कि वो बहुत मज़बूत है.

भाजपा ने “कांग्रेस-मुक्त भारत” के अपने नारे पर ज़ोर देते हुए “कांग्रेस-मुक्त गुजरात” का नारा भी दे दिया और ये तय कर लिया कि किसी भी क़ीमत पर अहमद पटेल को हराना है. अहमद पटेल कांग्रेस के वरिष्ट नेता हैं और पार्टी में नंबर तीन की पोजीशन पर माने जाते हैं. कांग्रेस के योजनाकार अहमद पटेल को अपनी रणनीति के लिए जाना जाता है लेकिन भाजपा ने तय कर लिया कि इस बार पटेल को चुनाव में हराना है. इसके लिए भाजपा ने कांग्रेस के विधायकों को अपने पाले में करना शुरू किया और जल्दी ही कई विधायक भाजपा में चले गए.इतना ही नहीं शंकर सिंह वाघेला ने भी संकेत दे दिया कि वो अहमद पटेल के पक्ष में वोट नहीं करेंगे. स्थिति ऐसी हो गयी कि भाजपा नेता खुलेआम कहने लगे कि अब तो अहमद पटेल की हार तय है. कांग्रेस आलाकमान ने आनन् फानन में एक्शन लिया और अपने सभी बचे हुए विधायकों को कर्णाटक भेज दिया. कर्णाटक में कांग्रेस की ही सरकार है तो पार्टी ने विधायकों की ख़रीद-फ़रोख्त रोकने के लिए इस तरह का क़दम उठाया. इस पर भी ये हुआ कि जिस कर्णाटक कांग्रेसी नेता ने विधायकों के रहने का इंतज़ाम किया था उनको केन्द्रीय एजेंसी के छापे भी झेलने पड़े. अब तो ये साफ़ हो गया कि भाजपा किसी भी स्थिति में पटेल को सबक़ सिखाना चाहती है.

शायद इसी मौक़े पर कांग्रेस ने तय कर लिया कि किसी भी क़ीमत पर ये चुनाव जीतना ही है. अचानक ही पार्टी के बड़े नेता पटेल की सीट को लेकर एक्टिव हुए और रणनीति बनाने लगे. वोटिंग का दिन आया और शायद इसी दिन पटेल ने गुजरात कांग्रेस के बड़े नेता शक्ति सिंह गोहिल के साथ मिलकर मामला पलट दिया. वोटिंग के दौरान गोहिल की सतर्कता ने भाजपा का खेल बिगाड़ दिया और एक वोट से पटेल की जीत हुई. इस नाटकीय जीत ने कांग्रेस में नयी जान फूँक दी और अचानक ही पार्टी के कार्यकर्ताओं में जोश आ गया.जानकारों के मुताबिक़ भाजपा अभी भी राज्यसभा चुनाव में मिली कड़वी हार को पचा नहीं पायी है. ये हार भाजपा के अलावा अमित शाह के लिए भी बड़ी है क्यूंकि उन्होंने ही इस एक सीट के चुनाव को पार्टी की साख का विषय बना दिया था.

अहमद पटेल की जीत के बाद कांग्रेस ने राज्य में अपनी एक्टिविटी बढ़ा दी और जल्दी ही समीकरण बदलने लगे. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने अपने शालीन रुख़ में बदलाव किया और एक नयी आक्रामकता अपने अन्दर लेकर आये. एक समय राहुल के राजनीतिक तरीक़ों की आलोचना करने वाले उनकी तारीफ़ों के पुल बाँधने लगे. राहुल ने क्षेत्रीय नेताओं से मीटिंग करनी शुरू कीं और सभी भाजपा विरोधी लोगों को अपने पाले में लाने लगे. इसमें उन्हें बड़ी कामयाबी ओबीसी नेता अल्पेश ठाकुर को अपने पक्ष में लाकर मिली. इसके अलावा पाटीदार नेता हार्दिक पटेल भले ही कांग्रेस में ना जा रहे हों लेकिन ये साफ़ है कि वो विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सपोर्ट कर रहे हैं.दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने भी कल कांग्रेस उपाध्यक्ष से मिल कर ऐसे संकेत दे दिए हैं कि अब गुजरात में भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ गयी हैं. इन सब के अलावा मोदी सरकार की नीतियों ने भी कांग्रेस की मदद की है. गुजरात के व्यापारी समाज को नोटबंदी और GST ने बहुत नुक़सान पहुंचाया है.

182 सीटों वाली गुजरात विधानसभा में जीत किसकी होगी ये तो 18 दिसम्बर को पता चलेगा लेकिन मुक़ाबला किस ओर जा रहा है ये तो पता चल ही रहा है.

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