एक्सक्लूसिव: म्यांमार के मशहूर नेता एम्ए ग़फ़्फ़ार ने बताया था रोहिंग्या मुद्दे का समाधान, जानिये क्या कहा था..

म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों की समस्या आज की नहीं है औपनिवेशिक काल से भी पहले की है. हालाँकि इस समस्या के समाधान को लेकर भी लोगों ने काम किया है लेकिन अभी तक कोई नतीजा मिल नहीं सका है. इस बारे में सबसे पुख्ता और मज़बूत काम करने वाले शख्स का नाम मुहम्मद अब्दुल गफ्फार था. गफ्फार अराकान के ही रहने वाले थे जिसे आज रखीने प्रांत के नाम से जाना जा रहा है. बर्मा के पहले प्रधानमंत्री यू नो की सरकार में वो स्वास्थ मंत्री भी रहे.

गफ्फार जो कि अलीगढ मुस्लिम विश्विद्यालय से भी पढ़े थे, उन्होंने पूरी कोशिश की कि रोहिंग्या लोगों को आने वाले समय में कोई समस्या ना रहे लेकिन उनके बाद के नेताओं में वो जज़्बा और हौसला ना था.

20 नवंबर 1948 को, गफ़ार ने बर्मा संघ की सरकार के प्रधान सचिव को एक ज्ञापन प्रस्तुत किया था. इस ज्ञापन के ज़रिये गफ़्फ़ार ने मांग की थी कि रोहिंग्या नाम से अराकानी नस्ल के लोगों को राष्ट्र माना जाए. ये ज्ञापन 20 अगस्त 1951 को बर्मा के एक अंग्रेजी अखबार गार्जियन डेली में प्रकाशित हुआ था. उस आर्टिकल का एक अंश जो हमें प्राप्त हुआ है, यहाँ साझा कर रहे हैं.

“हम, अराकान के रोहिंग्या एक राष्ट्र हैं। हम मानते हैं और इस पर क़ायम हैं कि अराकान में रोहिंग्या और अराकनी दोनों प्रमुख राष्ट्र हैं। हम लगभग 9 लाख लोगों का एक राष्ट्र हैं, जो एक देश की आबादी के लिए पर्याप्त है; और इसके अतिरिक्त हम एक राष्ट्र की किसी भी परिभाषा के अनुसार एक राष्ट्र हैं, हमारी अपनी विशिष्ट संस्कृति और सभ्यता, भाषा और साहित्य, कला और वास्तुकला, नाम और नामकरण, मूल्य और अनुपात की भावना, कानूनी कानून और नैतिक कोड, सीमा शुल्क और कैलेंडर, इतिहास और परंपराओं, योग्यता और महत्वाकांक्षा; संक्षेप में, हम जीवन और जीवन के बारे में हमारी विशिष्ट दृष्टिकोण रखते हैं। अंतर्राष्ट्रीय कानून के सभी सिद्धांतों के अनुसार, रोहिंग्या अराकान में एक राष्ट्र हैं।”

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