भाजपा विरोधी से इमरान प्रतापगढ़ी विरोधी बनने वाले साहब के लिए..

इमरान प्रतापगढ़ी अच्छे शा’इर हैं या बेकार, इसको लेकर तो सबकी अपनी अपनी समझ और राय हो सकती है. कुछ लोग उन्हें तकनीकी बुनियाद पर कमज़ोर शा’इर भी मानते होंगे तो कुछ लोग उनके जज़्बाती बयान के लिए अच्छा भी मानते हैं. पर दिलचस्प ये है कि जो लोग कुछ वक़्त पहले तक उन्हें बहुत शानदार शा’इर मानते थे और इस बात का दंभ भरते थे कि इमरान से उनकी दोस्ती है, वही लोग आज इमरान को घटिया शा’इर बता रहे हैं.

असल में बात ये है कि नांदेड़ वाघला म्युनिसिपल कारपोरेशन के चुनाव को लेकर. हुआ ये कि इमरान इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी का प्रचार करने पहुँच गए. उन्होंने यहाँ भाजपा जैसे दलों को हराने के लिए कांग्रेस को वोट देने की अपील की. बस क्या था कुछ इसी बात पर उनसे नाराज़ हो गए.ऐसे ही एक साहब हैं जो एक दौर में उनकी शा’इरी के फैन थे और अब इमरान को घटिया शा’इर कहने लगे हैं.

समझने की बात है कि ये लोग कौन हैं? ये वो लोग हैं जो दिन-रात ये कहते फिरते हैं कि वो भाजपा जैसी पार्टियों के विरोधी हैं. अगर वो भी भाजपा जैसी पार्टियों के विरोधी हैं और इमरान भी भाजपा के ख़िलाफ़ वोट मांग रहे हैं तो परेशानी क्या है?

परेशानी है, असल में इमरान से भी लोगों को कुछ ना कुछ फ़ायदा होता रहा है लेकिन इंसान हर समय तो मदद कर नहीं सकता और जब इमरान ने ऐसे ही एक शख्स को मदद से इनकार कर दिया तो फिर क्या.. खोल दिया मोर्चा. इमरान घटिया शा’इर, दलाल, जहन्नुम में जनसभा करने वाला, मतलब कुछ भी. अपनी जान-पहचान और चापलूसी के दम पर किसी वेबसाइट में ख़बर छपवा लेने का मतलब ये नहीं कि आप समझदार हो गए. हो सकता है इमरान का रेट ढाई लाख रूपये है और हो सकता है कुछ और लेकिन इससे आपको क्या परेशानी है, क्या इस वजह से आपका खाना-पीना रुका है, आपका आना-जाना रुका है? कुछ नहीं ना रुका. वैसे परेशानी है आपको लेकिन अब हम क्या कहें.

(अरग़वान रब्बही)

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