ओवैसी अगर महागठबंधन का हिस्सा बने तो बदल जाएँगे सारे समीकरण, भाजपा की..

November 7, 2018 by No Comments

पिछले कुछ सालों में अगर कोई क्षेत्रीय पार्टी सबसे अधिक उभरी है तो वो हैदराबाद के सांसद असद उद्दीन ओवैसी की पार्टी आल इंडिया मजलिस ए इत्तिहादुल मुस्लिमीन ही है. हैदराबाद में एक समय प्रभावी रहने वाली पार्टी आज देश के कई राज्यों में दख़ल दे रही है. इसमें कोई दो राय नहीं कि अधिकतर राज्यों में ये पार्टी बस इक्का-दुक्का सीट जीत सकती है लेकिन कुछ सीटों पर इसके पास इतना वोट ज़रूर है कि दूसरा मुस्लिम प्रत्याशी न जीत सके.

ऐसे में एआईएमआईएम और बाक़ी भाजपा विरोधी पार्टियों का वोट न बंटे उसके लिए ज़रूरी है कि महागठबंधन में सभी शामिल हो जाएँ. हाल ही में सपा के वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान ने इशारों में ये बात कही भी कि ओवैसी को साथ लेना ज़रूरी है. मुश्किल लेकिन ये है कि सेक्युलर हिन्दू और सेक्युलर मुस्लिम दोनों में ओवैसी की पार्टी की इमेज एक कट्टर मुस्लिम पार्टी की है. हालाँकि ओवैसी इस बात से बार बार इनकार करते हैं और कहते हैं कि उनकी पार्टी मुसलमानों की नहीं बल्कि सभी की पार्टी है. इसको लेकर वो ये भी तर्क देते हैं कि उनकी पार्टी हिन्दू समाज के लोगों को भी टिकट देती है.

असल में ओवैसी को साथ में लेने से मुस्लिम वोट के बंटने की उम्मीद कम हो जाएगी. ओवैसी भी जमकर कांग्रेस पर हमला बोलते रहते हैं, ऐसे में महागठबंधन में उनकी पार्टी का आना मुश्किल हो जाता है. कर्णाटक में ओवैसी की पार्टी ने जेडीएस को समर्थन दिया था जिसका फ़ायदा कुमारस्वामी को मिला और तेलंगाना में भी टीआरएस को ओवैसी समर्थन देते हैं. उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा में इस बारे में मंथन चल रहा है कि ओवैसी को गठबंधन में शामिल किया जाए या नहीं अगर शामिल करते हैं तो कितनी सीटें ओवैसी को देनी होंगी..अगर ३ सीटें भी दी गयीं तो भी सपा-बसपा इसको नुक़सान की तरह लेते हैं. कुल मिला कर पेंच तो फंसा हुआ है लेकिन ओवैसी अगर महागठबंधन में आ गए तो सारे समीकरण बदल जायेंगे. ऐसा होने पर भाजपा का उत्तर प्रदेश से सफ़ाया भी हो सकता है लेकिन ये बात भाजपा के फेवर में भी जा सकती है. तब सारा मुआमला उल्टा पड़ जाएगा.

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