गुजरात चुनाव: अपनी रणनीति भूल कांग्रेस के चक्कर में पड़ी भाजपा

गुजरात में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही मुख्य दलों ने चुनावी कैंपेन शुरू कर दिया है. जहाँ कांग्रेस ने इस बार बिलकुल ही अलग रणनीति अपनाई है वहीँ भाजपा के लिए यही मुसीबत बन गया है. भाजपा के कुछ नेता ये समझ नहीं पा रहे हैं कि वो कांग्रेस के चुनावी कैंपेन की बढती पॉपुलैरिटी का किस तरह मुक़ाबला करें.

जानकारों के मुताबिक़ भाजपा अब कांग्रेस की चाल देखकर क़दम बढ़ा रही है लेकिन मुसीबत ये है कि कांग्रेस लगातार सरप्राइज कर रही है. भाजपा को लग रहा था कि पाटीदार नेता हार्दिक पटेल कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी के दौरे के वक़्त कांग्रेस में शामिल हो जायेंगे. भाजपा के लोगों को लगता था कि अगर ऐसा हो जाएगा तो वो हार्दिक पटेल को खुले तौर पर टारगेट कर पायेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. हालाँकि हार्दिक पटेल ने जिस तरह का स्टैंड लिया हुआ है वो भाजपा को लगातार नुक़सान पहुँचा रहा है. स्थिति ये है कि भाजपा आईटी सेल ने हार्दिक पटेल के असर को कम करने के लिए #patidarwithbjp हैशटैग भी चलाया.

गुजरात गौरव यात्रा में भी भाजपा को उम्मीद के मुताबिक़ रेस्पोंस नहीं मिल रहा. अमित शाह के भाषण के वक़्त पाटीदार युवाओं का विरोध अपने आप में पार्टी के लिए बुरा संकेत है.

इसके अतिरिक्त अब भाजपा अपने किये गए कार्यों की चर्चा करने के बजाय राहुल गाँधी पर हमले कर रही है. एक ओर भाजपा के बड़े नेता राहुल को संजीदा ना मानने की बात करते हैं वहीँ पूरे दिन उन्हीं पर चर्चा भी कर रहे हैं.

बुलेट ट्रेन को लेकर शुरू हुई चर्चा से जो फ़ायदा भाजपा को होने लगा था वो मुंबई में एलफिंसटन रोड स्टेशन पर हुए हादसे के बाद बेकार हो गया है. इस मामले में सहयोगी शिव सेना ने जिस तरह से भाजपा और केंद्र सरकार की आलोचना की है उससे भाजपा के लिए सिर्फ़ मुसीबतें ही बढ़ी हैं.

गुजरात विधानसभा में कुल 182 सीटें हैं. भाजपा जहाँ इस कोशिश में है कि किसी प्रकार वो सत्ता बचाने में कामयाब रहे वहीँ कांग्रेस लगातार चुनाव में 100 से ऊपर सीटें लाने की बात कर रही है.

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