गुजरात में लगातार पिछड़ रही है भाजपा; क्या कांग्रेस कर पाएगी कमाल?

गुजरात विधानसभा चुनाव में अब बहुत कम समय बचा है, ऐसे में भाजपा, कांग्रेस और दूसरी पार्टियाँ अपनी अपनी तैयारियों में जुट गए हैं. ऐसा माना जा रहा है कि हर बार की तरह इस बार भी लड़ाई कांग्रेस और भाजपा के बीच होगी. हालाँकि इस बार कांग्रेस की स्थिति पिछल कई चुनावों से अच्छी लग रही है. आम आदमी पार्टी भी इस कोशिश में है कि राज्य में वो कुछ राजनीतिक पहचान क़ायम कर पाए वहीँ बसपा भी अपनी तरफ़ से कुछ ना कुछ हासिल करने की कोशिश में है.

चुनावी घमासान की अगर हम बात करें तो ऐसा लगता है कि कांग्रेस पूरी तरह से फॉर्म में है और भाजपा से सीधे दो-दो हाथ करने की तैयारी में है. सोशल मीडिया कैंपेन के बारे में तो हम पहले ही बता चुके हैं कि कांग्रेस ने इसमें भाजपा को बुरी तरह पछाड़ दिया है. वहीँ अब भाजपा आईटी सेल “#PatidarwithBJP” जैसे हैशटैग चला कर साख बचाने में लगी है. ज़मीन की भी बात करें तो ऐसा लगता है कि कांग्रेस ने चुनावी कैंपेन में भाजपा से पहले और भाजपा से तगड़ी शुरुआत की है. इतना ही नहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष के तीन दिवसीय दौरे में जिस प्रकार से भीड़ जुटी भाजपा नेताओं के चेहरे पर पसीने आ गए हैं. जिस नेता को भाजपा नेता पप्पू पप्पू कहते थे वही नेता आज युवाओं की पसंद बन गया है. राहुल की बढती पॉपुलैरिटी से भाजपा को 2019 लोकसभा चुनाव की रणनीति बदलनी पड़ सकती है लेकिन फ़िलहाल गुजरात चुनाव की बात करें तो ये भाजपा के लिए एक कड़ी चुनौती बन गया है.

भाजपा के लिए चुनौती ये भी है कि वो कैसे पिछड़ी जातियों के वोट को अपने पक्ष में बनाए रखे. पाटीदार आन्दोलन में गुजरात सरकार के रवैये की वजह से पाटीदार लोग नाराज़ हैं. वहीँ ऊना वारदात ने दलितों को भाजपा के ख़िलाफ़ कर दिया है. GST की वजह से व्यापारी बड़े स्तर पर भाजपा से नाराज़ हैं और पार्टी के लिए इनको समय पर मनाना मुश्किल बात हो गयी है.

कांग्रेस के सूत्रों से मालूम हुआ है कि गुजरात कांग्रेस के लोग चाहते हैं कि शक्ति सिंह गोहिल को मुख्यमंत्री चेहरा बनाया जाए. गोहिल ने राज्यसभा चुनाव में अहमद पटेल की जीत को लेकर मुख्य भूमिका निभायी थी. अहमद पटेल चुनाव में जीत होने से कांग्रेस में जो उत्साह आया है वो पिछले दस सालों में कभी देखने को नहीं मिला है. गोहिल ही वो व्यक्ति थे जिन्होंने शीर्ष नेतृत्व को पटेल की जीत बचाने के लिए विधायकों को कर्नाटक भेजने की सलाह दी थी.

गुजरात विधानसभा में कुल 182 सीटें हैं. भाजपा जहाँ इस कोशिश में है कि किसी प्रकार वो सत्ता बचाने में कामयाब रहे वहीँ कांग्रेस लगातार चुनाव में 100 से ऊपर सीटें लाने की बात कर रही है.

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