नफ़रत फैलाने वाले नाकाम, हादिया आज़ाद!

November 27, 2017 by No Comments

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज एक अहम् फ़ैसला सुनाया. ये मामला केरल की हादिया का है जिसे उसके माँ-बाप ने ग़ैर-क़ानूनी तरह से 11 महीने से क़ैद में रखा हुआ था. सुप्रीम कोर्ट ने हादिया को आज़ादी दिलायी और साथ ही उसकी अधूरी पढ़ाई पूरी करने के लिए सहुलत भी दी. अदालत में हादिया ने जस्टिस चन्द्रचूर्ण से बातचीत में कहा कि वो आज़ादी चाहती हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने हादिया से सवाल किया कि अगर सरकार उनकी आगे की पढ़ाई का पैसा उठाये तो क्या वो BHMS कम्पलीट करना चाहेंगी, इसपर उन्होंने कहा कि सरकार के पैसे की उन्हें ज़रुरत नहीं है और उनका पति ख़ुद में सक्षम है. हदिया सलेम से BHMS की पढ़ाई कर रही हैं, उनकी इंटर्नशिप पूरी नहीं हुई. सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेज को आदेश दिया है कि वो उसका दाख़िला ले और साथ ही हॉस्टल में रहने की व्यवस्था भी करे.

केरल की हादिया 24 साल की हैं. उन्होंने हिन्दू धर्म से इस्लाम धर्म अपना लिया है और इसके बाद उनकी शादी शाफ़िन नामक एक युवक से हुई है. इस बात से हादिया के माँ-बाप ख़ुश नहीं थे. दक्षिणपंथी संघठनों ने इंसानी जज़्बात को अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने के लिए इसे “लव-जिहाद” का नाम दिया. इस फ़ैसले से हादिया और उसके पति को बड़ी राहत मिली है जबकि “लव-जिहाद” का राग अलाप कर नफ़रत की राजनीति करने वालों को बड़ा झटका लगा है. कौन किस तरह से अपनी ज़िन्दगी बसर करना चाहता है ये उसका व्यक्तिगत अधिकार है लेकिन आजकल लोगों को ये बात समझ नहीं आती.

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