हमबिस्तरी के लिए लड़की खरीदी लेकिन तभी हुआ ऐसा कि वो जिना…. ये सच्चा वाकिया ज़रूर पढ़े

बग़दाद में अब्दुल सबीर नाम का कपडे का एक व्यापारी था,सबीर के पास बेशुमार दौलत थी.उसकी शहर में बहुत इज्ज्ज़त थी.व्यापार के सिलसिले में अक्सर काहिरा जाता रहता था.काहिरा में जब भी उसका जाना होता था तो वो अय्याशी का कोई मौक़ा नही छोड़ता था.वो अपने यार दोस्तों के साथ मिलकर खूबसुरत लड़कियों को बाज़ार से खरीदता था और फिर उसके साथ सब मिलकर हम बिस्तरी करते थे.

काहिरा में करता था अयाय्शी
सबीर के लिए काहिरा किसी जन्नत से कम ना थी वो जब भी आता अपने कपडे को बेचकर अच्छी खासी दौलत बटोरता और फिर अपनी जिस्मानी शौक को पूरा करता.सबीर का काहिरा में साल में दो बार चक्कर लगता था.

सबीर जब काहिरा से बगदाद आता तो शराफत का ऐसा चोला ओड़ लेता कि वो कितना शरीफ है और दीनदार आदमी है.सबीर का बगदाद में पूरा परिवार था उसकी बीबी के अलावा तीन बेटियाँ और दो बेटे थे.

व्यापार से ज्यादा ज़िनाकारी की चाहत
साल 1203 में मार्च के महिने में उसका कपड़ो का माल बिकने को बिलकुल तैयार था सबीर ने मार्च के अंत में अपना सफर शुरू कर दिया.सबीर को अपने कारोबार से ज्यादा अपनी ज़िश्हमानी हवस को पूरी करने की चाहत थी.

काहिरा पहुचकर उसने सबसे पहले अपने माल को बेचने के लिए दुकानदारो से मिला और अपना माल बेचने के लिए जब मोल भाव किया उसका माल सही रेट पे नही बिका रहा था.काहिरा में सुखा होने से लोगो के पास पैसा नही था.थक हार के वो उस सराय पहुचा जहाँ वो हमेशा ठहरता था.

गरीब खूबसूरत लड़की को देखा
सुबह वो जब मंडी पहुचा वहां एक खूब सूरत लड़की भीख मांगती दिखी.लड़की ने जब उससे अल्लाह के नाम मदद की बात कही उसने तुरंत कहां,तुम बहुत खूबसूरत हो अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हे दो सौ अशरफी दे सकता हूँ.

लड़की ने कहा,आप की बहुत इनायत होगी.सबीर ने कहा,लेकिन मैं ये पैसे ऐसे नही दूंगा.तुमको मेरे साथ कुछ समय बिताना होगा,मैं तुम्ह्रारे साथ हम बिस्तरी करना चाहता हूँ लड़की ने कुछ देर सोचने के बाद कहां ठीक है मैं तैयार हूँ.

सबीर ने कहा मैं कुछ देर बाद तुमको पैसे दूंगा ,अभी मैं माल बेचने जा रहा हूँ तुम यही रहना.इतना कह के सबीर दुकानदार के पास जाता है और कहता मेरा माल ले लो.दुकानदार कहता है भाई मैं उस कीमत में नही ले पाउँगा जितने में आप बेचते थे दुकानदारी कम हो गयी है.

लड़की खरीदने के लिए कम घाटे में माल बेचा

सबीर कहता है मेरा पूरा माल की कीमत 600 अशर्फी है लेकिन अगर तुम अभी नकद पैसे दे सकते हो तो मैं आप को इसे सिर्फ 250 अशर्फी में दे दूंगा.दुकान दार खुश होकर माल ले लेता है और सबीर को पैसे दे देता है.

लड़की से जब हमबिस्तरी करना चाहा फिर..
माल बेचकर वो लड़की के पास जाता है और उसे दो सौ अशर्फी दे कर अपने साथ सराय में ले जाता है.वो लड़की को चारपाई में बैठाने के बाद कहता है तुम बहुत खुबसूरत हो.मैंने पहली बार घाटा करके माल बेचा है.

क्युकी तुम्हे देखते ही मेरी मर्दानगी जाग गयी थी.तुमको तुम्हारी कीमत दी तुम मुझे खुश कर दो ,मज़े दो.इसके बाद वो लड़की का दुपट्टा हटाता है.जैसे ही वो लड़की के होंठ के पास अपने होंठ लेकर बोसा लेने वाला था लड़की फूट फूट के रोने लगी.

सबीर गुस्सा हो जाता है कहता है बहुत कीमत दी है और तुम रो कर मेरा मूड खराब कर रही.इस पर लड़की कहती है जी आप ने बहुत कीमत मेरी लगाई अपना नुक्सान भी किया लेकिन मैं ये गुनाह पहली बार करने जा रही हूँ.

लड़की आगे बोली,मैं बहुत दीनदार घर की लड़की हूँ मेरे अब्बा एक मस्जिद के इमाम थे लेकिन अब्बू के इन्तेकाल के बाद अब हम पैसे से मजबूर है,कर्जा बहुत हो गया इसलिए जब आपने दो सौ अशर्फी की बात कही तो गरीबी मिटाने और कर्जा निपटाने के वजह से मैं तैयार हो गयी.

लेकिन अब मैं सोच रही हूँ गरीबी मिटाने के लिए मैं ऐसा गुनाह कर रही हूँ जिसको अल्लाह कभी माफ़ नही करेगा.ये सुनकर सबीर के अंदर लड़की के लिए हमदर्दी जाग जाती है.वो लड़की को पानी देता है.

इसके बाद सबीर कहता है,मैं बहुत लड़कियों के साथ जिस्म की भूख मिटाने के लिए सोया हूँ लेकिन तुमसे मुझे मोहब्बत हो गयी है.मैं तुमसे एक चीज़ की गुज़ारिश करूँगा.जो अशर्फी मैंने तुम्हे दी है वो तुम रख लो लेकिन अगर तुम राज़ी हो तो ही मेरी बात मानना वरना.

अब लड़की के लिए हमदर्दी जागी

सबीर कहता है मैं तुमसे निकाह करना चाहता हूँ अगर तुम राज़ी हो अपनी ख़ुशी से ना की मेरा अहसास के दवाब में.बिना दवाब के मुझे बताओ लड़की खामोश रहती है कोई जवाब नही देती है.

सबीर कहता है तुम राज़ी हो इस पर लड़की कहती नही.आप उम्र में मुझसे बड़े है अगर मेरी मर्ज़ी सुनना चाहते है तो नही लेकिन आप जो मदद की है उसके वज़ह से हा मैं तैयार हूँ.

और मैं आप को हर ख़ुशी दूंगी जो तुम मुझसे चाहते हो. ये सुनकर साबिर ने कहा तुम्हारी मर्ज़ी है वही मैं करूँगा वो लड़की को जाने को कहता है.

अपने गुनाहों की माफ़ी मांगता है

सबीर सराय में रात में लड़की के बारे में सोचता है और इस ख्याल से परेशान रहता है उसने ना जाने कितनी लडकियों की मज़बूरी का फायदा उठाया होगा वो अपने गुनाहो की माफ़ी रात से ही माँगना शुरू कर देता है.

बगदाद पहुचते पहुचते वो अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी मांगता रहता है.वो बग़दाद पहुचकर अपनी दौलत का आधा हिस्सा गरीबो में बाट कर अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी की इल्तजा दिन रात करता रहता है.

कुछ ही दिन में उसका इन्तेकाल हो जाता है.दोस्तों सबीर एक गुनाहगार शख्स था लेकिन उसने अपने गुनाहों की माफ़ी मांगी उसके बाद कोई गुनाह नही किया और अल्लाह ने उसे ऐसी हालत में मौ’त दे दी.

सबीर ने दुनिया से विदा लेकर हकीकी ज़िन्दगी के लिए अपनी कामयाबी लिख ली और अल्लाह भी उससे राज़ी हो गयी अल्लाह हर मुस्लिम को ऐसी हिदायत फरमाए.अमीन

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