हर दुआ कुबूल हो गयी 100%, हजरत मौलाना पीर जुल्फेकार अहमद नक्शबंदी मज्दी दामत बरकातहेम

दोस्तों अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह व बरकातहू दोस्तों आज हम बताएंगे की दुआ कैसे कुबूल होती है दोस्त आवाज के साथ में लोग ऐसा समझते हैं कि हमारे मुंह से निकले और पूरा हो जाए लोगों के अंदर सब्र नहीं हैं दोस्तों अल्लाह फरमाते हैं कि तुम अगर कोई दुआ करो और वह ना पूरी हो तो उसे छोड़ो मत कयामत के दिन उसका असर अल्लाह पाक हमें अता करेगा दोस्तों जैसे बीवियां अपने मर्दों से सुबह कुछ काम कहती हैं और वह शाम को पूरा हो जाना चाहिए ऐसा बोलती हैं.
तो वैसे ही वह अल्लाह पाक को भी डील करती हैं और फिर वो शिकवा करती हैं कि हमने सुबह फज्र में दुआ मांगी थी और शाम को दुआ पूरी नहीं हुई.दोस्तों आपको बता दें कि अल्लाह पाक अल्लाह पाक हैं और उससे शिकवा नहीं करते उससे मागने का एक तरीका होता है उसकी वाहा अजिजी चलती है अल्लाह से गिरगिरा के अजीजी के साथ मांगा जाता है दोस्तों कई मर्तबा और कहती है कि मैंने दुआ मांगी और वो कुबूल नहीं हुई इसलिए मैंने दुआ मांगना छोड़ दिया योनि जैसी खविंड से रूठ जाते हैं.

यह खुदा की बंदिया खाविंड की तरह अपने खुदा से भी कम इल्मी कि वजह से रूठ जाती है दोस्तों लोग ही यह नहीं देखते की दुआ मांगने में कोई कमी रह गई है किस वजह से एप्लीकेशन रिजेक्ट हो गई है उस पर गौर नहीं करती और कहते हैं कि अल्लाह पाक हमारी पुकार नहीं सुनता हमारी दुआ नहीं सुनता.

लेकिन दोस्तों हदीसे पाक में आता है कि हर बंदे की दुआ कबूल होती है लेकिन दोस्तों को कुबूलियत के तीन अंदाज हैं एक तो जैसे ही मांगा वैसे ही भूल हो गई दूसरी कि अल्लाह पाक उसके बदले कोई मुसीबत हटा देता है या उसको नाम ए अमल में ज़ख़ीरा के तौर पर लिखवा देते है.दोस्तो अल्लाह पाक ने फरमा दिया है कि किसी भी बंदे कि दुआ को रद्द नहीं करते है अल्लाह इतना रहीम है कि वो तो गैर मुस्लिमो को भी बिना मागे देता है.दोस्तो अल्लाह के नरज ने इस दुनिया की कीमत मच्छर के पर के बराबर भी नहीं हैअल्लाह पाक ने फरमा दिया तुम राई के दाने के बराबर इमान बचा कर ले आओ दुनिया से हम तुम्हे इस दुनिया से दस हूं गुना बड़ी जन्नत देंगे।।

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