अगर हाथ पर दिख रहा है 'X' निशान….तो जाने इसका क्या मतलब होता है ?

March 22, 2019 by No Comments

इंसानी हाथों पर उभारों और लकीरों के इलावा कई छोटे छोटे निशान मौजूद होते हैं जो बे-मक़्सद नहीं होते जैसा कि हाथों पर मुरब्बा का निशा’न पाया जाता है.चार लकीरों का मिलकर बनना मुरब्बा कहलाता है,उसे चौकोर या स्क्वायर भी कहते हैं और ये हाथ की किसी भी जगह और लकीर पर हो सकते हैं.ये जहां भी होंगे उनका मक़सद इस लकीर के साथ जुड़ा हुआ होगा.
जैसा कि माहिरीन दस्त शनास की नज़र में जब ऐसा मुरब्बा उम्र की लकीर से बाहर हुआ और मिर्रीख़ के मैदान को छूता हो तो इस का मतलब होगा कि ऐसा फ़र्द उम्र के इस हिस्से में क़ैद व बनद का सामना करेगा.किसी अलग मुक़ाम पर भेज दिया जाना,अलग मुक़ाम पर ख़ुद ही ज़िंदगी बसर करना,बसा-औक़ात ज़रूरी नहीं वो जे’ल में जाएगा बल्कि उस के लिए अपने मआशी घरेलू हालात भी बंदिश लगा देते और वो एक मख़सूस दायरे में रहता है.

लेकिन जब यह मुरब्बा की लकीर कुछ आगे बढ़ जाये,तो समझिए जो ख़तरा दरपेश था दूर हो गया.अगर क़िस्मत की लकीर मुरब्बा के दरमयान आकर टूट भी जाये तो कोई बात नहीं कोई ख़तरा लाहक़ ना होगा.ख़तरा दरपेश होगा भी तो दूर हो जाएगा.अगर क़िस्मत की लकीर किसी मुरब्बा के नज़दीक गुज़र जाती है और कुछ ना कुछ छू जाती है और छूने वाली जगह ज़ुहल के अ॒भार के नीचे होती है.
तो इस का ये मतलब है कि हादिसा से वो फ़र्द बाल बाल बचेगा।ऐन-मुमकिन है कि हादिसा पेश आए।नज़दीकी साथी म-र जाएं या ज़-ख़मी हो जाएं और ऐसा फ़र्द बच जाये.अगर मुरब्बा दिमाग़ी लकीर की राह में हो या दिमाग़ी लकीर मुरब्बा के अंदर से गुज़र जाये,तो समझिए कि दिमाग़ मज़बूत है वो किसी हादिसा से भी महफ़ूज़ रहेगा.

लेकिन इतना ज़रूर होगा कि इस वक़्त दिमाग़ पर कुछ ज़ोर पड़ेगा।दिमाग़ तफ़क्कुरात में मुबतला होगा लेकिन बचत हो जाएगी.अगर एक मुरब्बा ज़ुहल के नीचे ज़िंदगी यानी उम्र की लकीर पर पैदा हो तो समझिए कि दिमाग़ को कुछ ख़तरा पेश था और बचत हो गई।ऐन-मुमकिन है कि दिमाग़ को चोट लगे और वो सलामत हो जाये.
इसी तरह जिनके हाथ की हथेली पर ‘X’ का निशान है इन अफ़राद की शख़्सियत की अलामात उन लोगों की एहसास करने हिस बहुत तेज़ और होती है.और यह लोग दूर से ही कोई भी खत’रा महसूस कर लेते हैं.ये लोग दूर से ही ख़तरे,बेवफाई और धोके बाज़ी का एहसास कर लेते हैं.वक़्त गुज़रने के साथ साथ उनके इर्द-गिर्द ऐसी ताक़त पैदा हो जाती है कि लोग उनके बीच दख़ल अंदाज़ी से भी घबराते हैं.
अगर आप उनसे झूट बोलने की कोशिश करेंगे तो उनका सबसे बुरा हिस्सा देखने को मिलेगा,ये आपको मा’फ़ तो कर देंगे पर कभी आपकी धोके बाज़ी भूलेंगे नहीं और उन्हें कभी कोई नीचा नहीं दिखा सकता ना ही नुक़्सान पहुंचा सकता है,यही उनकी क़िस्मत है.ये अफ़राद बहुत तेज़,दूर-अँदेश और ज़हीन और बेहतरीन यादाशत के हामी हैं.ये लोगों को आसानी से अपना लेते हैं पर उनके साथ गड़बड़ करना बहुत महंगा साबित हो सकता है.

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