हज़रत अली की कब्र छुपा के क्यों बनाई गयी? मौलाना रज़ा ने फरमाया….

February 17, 2019 by No Comments

मौला अली रज़ी अल्लाहु ताला अनहु इस्लाम के चौथे खलीफा हैं,आप अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम के चाचा के बेटे दामाद हैं,अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी सबसे छोटी बेटी सय्यदा फातिमा रज़ी अल्लाहु ताला अनहा की शादी मौला अली रज़ी अल्लाहु ताला अनहु से की थी।
मौला अली रज़ी अल्लाहु ताला अनहु जब इस्लाम के खलीफा हुये तो उस वक़्त मदीना शरीफ के हालात ठीक नहीं थे,आप से पहले खलीफा हज़रत उस्मान गनी रज़ी अल्लाहु ताला अनहु को शहीद कर दिया गया था, जिसकी वजह से पूरे मदीना में तनाव का माहौल था।जिसकी वजह से मौला अली रज़ी अल्लाहु ताला अनहु ने इस्लामी राजधानी इराक़ के कूफा शहर को बना दिया।और वहीं पर आप भी चले गए।

मौलाना रज़ा


मौला अली रज़ी अल्लाहु ताला अनहु जब खिलाफत करने लगे तो उस वक़्त एक गुट आप के खिलाफ हो गया, जिसकी वजह से शादीद लड़ाई भी हुई, इस लड़ाई के बाद एक ऐसा गिरोह पैदा हुआ जिसे इस्लाम में खारजी कहा जाता है,यह गिरोह मौला अली रज़ी अल्लाहु ताला अनहु का जानी दुश्मन बन गया और हर मौके पर आप को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने लगा।
और इसी गिरोह के एक बदबखत शख्स ने एक दिन आप को शहीद कर दिया।सही रिवायत के मुताबिक़ मौला अली रज़ी अल्लाहु ताला अनहु पर कूफ़ा की जामा मस्जिद में चालीस हिज्री 17 रमज़ान बरोज़ जुमा फ़जर की नमाज़ के वक़्त अबदुर्रहमान इबन-ए-मलजम ने क़ातिलाना हमला किया।जिसकी वजह से आप मौला अली रज़ी अल्लाहु ताला अनहु 19 रमज़ान उल-मुबारक को शहीद हो गए।कफ़न दफ़न हज़रत हसन,हुसैन,हनीफा और अब्दुल्लाह बिन जाफ़र रज़ी अल्लाहु अन्हुम ने किया और बाक़ी लोग भी साथ थे।
जनाज़ा हज़रत हसन बिन अली बिन अबी तालिब रज़ी अल्लाहु अनहुम ने पढ़ाया और आप मौला अली रज़ी अल्लाहु ताला अनहु को गवर्नर हाऊस के पास कूफ़ा में ही दफ़न किया गया।लेकिन मौला अली रज़ी अल्लाहु ताला अनहु की क़ब्र मुबारक को खु़फ़ीया रखा गया क्योंकि ख़ारिजियों के बेहुरमती करने का डर था।
मौला अली रज़ी अल्लाहु ताला अनहु के क़ब्र मुबारक को छुपा दिया गया,इस बारे में किसी को खबर नहीं दी गई,क्योंकि अगर खबर लग जाती तो खारजी आप के क़ब्र को खोद डालतेऔर आप के जिस्म को नुकसान पहुंचाते,इस लिए छुपा दिया गया।किताबों में लिखा है कि छुपाने के बाद खारजी आप की क़ब्र को तलाश किया करते थे लेकिन आप की क़ब्र मुबारक का उन्हें कभी पता नहीं चल पाया।

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