अगर कोई इन पांच काम को कहे तो मोमिन कभी मना नही कर सकता है,हज़रत अली ने फ़रमाया…

February 28, 2019 by No Comments

मौला आली रज़ी अल्लाहु ताला अनहु फरमाते हैं कि इंसान को चाहिए कि वह कभी भी अल्लाह ताला के इलावा किसी से उम्मीद मत रखे,किसी इंसान से कुछ न चाहे,जो भी उम्मीद रखे,वह अल्लाह से रखे।क्योंकि सब कुछ इन्सानों को अल्लाह ताला ही देने वाला है।अल्लाह ताला ने कुरान पाक में इंसान के रोज़ी देने का वादा कर लिया है,कुरान में साफ साफ कहा गया है कि अल्लाह ताला जानवरों को भी रोज़ी देने वाला है,फिर आप तो इंसान हैं,आलह ताला आप को कैसे रोज़ी नहीं देगा।
इस लिए हमेशा अल्लाह ताला की बारगाह में अपने हाथों को फैलाएँ,किसी से न मांगें,क्योंकि आप अगर किसी से मांगेंगे,तो हो सकता है,वह आप को न दे,आप को शर्मिंदा होना पड़े,लेकिन अल्लाह ताला आप को कभी शर्मिंदा नहीं करेगा।अल्लाह ताला से जो भी मांगा जाएगा,वह ज़रूर पूरा करेगा।इसके इलावा आप ने फरमाया कि इंसान अपने गुनाहों से डरता रहे।

क्योंकि गुनाहगार रब की रहमत से दूर होता है।इस की ज़िंदगी परेशानी से घिरी होती है वो अपने गुनाहों के सबब रिज़्क़ से भी महरूम कर दिया जाता है।वहीं मोमिन वो होता है जिसे गुनाह पर डर महसूस होता है।अल्लाह से ख़ौफ़ खाता है और इस की सज़ा का ख़ौफ़ खाकर तौबा करता है और अपने गुनाहों पर शर्मिंदा हो कर आइन्दा ना करने का अज़म मुसम्मम करता है।
गुनाह करने वाला कभी कभार दुनिया वालों के सामने ही ज़लील हो जाता है और आख़िरत में जो रुस्वाई है वो अपनी जगह बरहक़ है।अल्लाह तआला न दुनिया में और ना ही आख़िरत में अहल फ़िस्क़ व फ़जोर को इज़्ज़त देगा।जो अल्लाह से डरता है.गुनाहों का ख़ौफ़ खाता है।बुराई से बचता रहता है अल्लाह ऐसे शख़्स को इज़्ज़त देता है।
वहीं मौला आली रज़ी अल्लाहु ताला अनहु फरमाते हैं कि अगर किसी से कोई सवाल किया जाये,उसका जवाब उसे न मालूम हो तो कह दे मुझे नहीं मालूम है.अगर वह यह बात नहीं कहता है और सवाल का गलत जवाब दे देता है,तो सवाल करने वाले के लिए परेशानी हो सकती है।इसलिए अगर किसी सवाल का जवाब न जानता हो तो ला इल्मी का इज़हार कर दे।कह दे कि मैं इस सवाल का जवाब नहीं जानता हूँ।

HAZRAT ALI


दुनिया में बहुत सारे लोग ऐसे भी हैं कि अगर उन्हें किसी सवाल का जवाब नहीं मालूम होता है, तो वह इस में अपनी तौहीन समझते हैं,यह सोचने लगते हैं कि अगर मैं यह बात नहीं बता पाया तो मेरी बेइज्जती हो जाएगी।इसलिए वह गलत मामला पेश कर देते हैं,इस से बचना चाहयिए।इसके इलावा आप ने फरमाया कि मुसीबत आने पर सब्र करे।
क्योंकि सब्र व तक़वा मोमिन के लिए दारेन की सआदत-ओ-सुर्ख़रूई से बहरा मंदी-ओ-सरफ़राज़ी के लिए दो अज़ीमुश्शान ज़रीये हैं।सब्र का हासिल और राह-ए-हक़ पर साबित-क़दम रहना ही तक़्वा का ख़ुलासा-ओ-मफ़हूम है हमेशा अपने ख़ालिक़-ओ-मालिक की रज़ा-ओ-ख़ुशनुदी के लिए उस के आगे सर-ए-तस्लीम ख़म रहना और हमेशा इस बुनियादी हक़ीक़त को अपने पेश-ए-नज़र रखना कि मेरा ख़ालिक़-ओ-मालिक मुझसे नाराज़ ना हो जाये कि इस का हक़ सबसे बड़ा सबसे मुक़द्दम और सब पर फ़ाइक़ है।
सब्र के हवाला से हज़रत अबूहुरैरा रज़ी अल्लाहु ताला अनहु रिवायत करते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि अल्लाह ताला का हुक्म है कि मैंने अगर किसी बंदे की बीनाई ज़ाइल कर दी और उसने इस आज़माईश पर सब्र किया और मुझसे सवाब की उम्मीद रखी तो में इस के लिए जन्नत से कम बदला देने पर कभी राज़ी नहीं हूँगा।तिरमिज़ी,जिल्द दोम,हदीस294..
एक और हदीस क़ुदसी में बयान है कि हज़रत अब्बू अमामा रिवायत है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि अल्लाह पाक फरमाता है आदम के बेटे अगर सदमा के शुरू में सब्र और सवाब की उम्मीद रखे तो मैं (तेरे लिए) जन्नत के इलावा और किसी बदला को पसंद ना करूँगा।-इबन माजा, जिल्द अव्वल,हदीस1597

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *