हजरत ओवैस करनी(र.अ.) की वफात, नबी करीम(स.अ.व्.) के सच्चे आशिक के जनाज़े पर क्या हुआ?

December 7, 2018 by No Comments

दोस्तों अस्सलाम वालेकुम व रहमतुल्लाह व बरकात दोस्तों एक बुजुर्ग फरमाते हैं कि हम इराक से मक्का मदीना की जानिब जाने के लिए निकले हमारे काफिले में बहुत से लोग थे जैसे ही हम इराक से निकले तो एक इराकी शख्स हमारे साथ चल पड़ा इसमें पुराना लिबास पहन रखा था इसके हाथ में एक आशा लाठी और इसके थैली में थोड़ा सा तोश था दरअसल वो और कोई नहीं बल्कि आशिकी रसूल हजरत ओवैस करनी रजि अल्लाह ताला अनु थे.
कॉफीले वाले इन्हें इस हालत में देखकर पहचान ना पाए बल्कि इनकी जाहिरी हालत देखते हुए कहने लगे कि ऐसा लगता है कि तुम कोई गुलाम हो हजरत सैयदना ओवैस करनी रजि अल्लाह ताला अनु ने आज जी के साथ कहा कि जी हां मैं एक गुलाम ही हो लोगों ने कहा कि हमारा अनुमान है कि तुम अपने आका से भागे हुए एक बुरे गुलाम हो आप रजि अल्लाह ताला अनु ने फरमाया जी हां ऐसा ही है लोगों ने कहा कि देखो तुम्हारे भागने पर तुम्हारा क्या हाल हो रखा है अगर तुम ना भागते तो तुम इस हालत पर ना पहुंचते.

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बेशक तुम बहुत बुरे और खताकार गुलाम हो आप रजि अल्लाह ताला अन्हा ने फिर आजिज़ी के साथ फरमाया कि बेशक मैं एक गुनाहगार गुलाम हूं और मेरा आकाश बहुत अच्छा है और गलती मेरी है अगर मैं इसकी इतात हूं और गलती ना करता तो मैं इसकी रजा का तालिब होता यह कहकर आप रजि अल्लाह ताला अन्हा रोने लगी और इतना रोए कि उनके रूह परवाज़ करने का वक्त करीब था.
लोगों को तरस आ रहा था लेकिन आप राज़ी अल्लाह ताला अनों अल्लाह के वली थे और उनका आका से मुराद अल्लाह पाक था फिर उनमें से एक शख्स ने कहा कि तुम परेशान ना हो मैं तुम्हारी आंखों से तुम्हारी आमाल ले लूंगा तुम उसकी तरफ रूजू हो जाओ.

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तो आप रजि अल्लाह ताला ने फरमाया कि मैं इसकी तरफ रूजू करता हूं और इससे इनाम का तालिब हूं दोस्तों से योजना ओवैस करनी रजि अल्लाह ताला अनु इस काफिले में शामिल इसलिए हुए थे क्योंकि उन्हें आका हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो वाले वसल्लम की जियारत करनी थी.

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