हिमाचल की जंग अब हुई वीरभद्र और धूमल के बीच; जानिये क्यूँ हैं वीरभद्र मज़बूत ?

November 7, 2017 by No Comments

वीरभद्र सिंह
कांग्रेस के वरिष्ट नेता और मौजूदा मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश वीरभद्र सिंह का जन्म 23 जून, 1934 को हुआ था. उन्होंने 1962 में अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ा और विजयी रहे. इसके बाद वो 1967 और 71 का भी लोकसभा चुनाव जीतने में कामयाब रहे.इसके बाद सन 1980 में वो फिर लोकसभा सदस्य चुने गए. राष्ट्रीय राजनीति में अपनी धाक जमा चुके वीरभद्र ने इसके बाद राज्य की राजनीति में दिलचस्पी दिखानी शुरू की. पहली बार वो सन 1983 में विधायक चुने गए. इसी वर्ष वो पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री भी बने. वीरभद्र सिंह कुल पांच बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं और अभी भी राज्य की राजनीति के सबसे मज़बूत चेहरा हैं. असल में जनता में उनकी एक शालीन छवि है और उनके कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश ने विकास भी किया है.

प्रेम कुमार धूमल
प्रेम कुमार धूमल का जन्म 10 अप्रैल, 1944 को हुआ. वो पहली बार सन 1998 में मुख्यमंत्री बने लेकिन उनका क़द राज्य में कभी भी वीरभद्र जैसा ना हो पाया. जानकारों के मुताबिक़ हिमाचल प्रदेश में भाजपा की जीत समीकरणों की वजह से ज़्यादा हुई है बजाय उनके नेता की छवि की वजह से. धूमल की राजनीतिक पारी की शुरुआत भारतीय जनता युवा मोर्चा से हुई और पहली बार वो 1989 में लोकसभा सीट जीते. 1991 में हुए लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने जीत हासिल की लेकिन 1996 में वो हार गए. वरिष्ट भाजपा नेता जगदेव चंद की मृत्यु के बाद धूमल ने राज्य की राजनीति का रुख़ किया और इस वर्ष वो हिमाचल प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष चुन लिए गए. धूमल 1998 से 2003 और 2007 से 2012 के पीरियड में राज्य के मुख्यमंत्री रहे. ऐसा माना जाता है कि उन्होंने सड़क निर्माण के कार्य किये जिस वजह से कुछ लोग उन्हें “सड़क वाला मुख्यमंत्री” भी कहने लगे. इतना कहने पर भी इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि जेपी नड्डा जैसे नेता भाजपा में उभर कर आये हैं जिस वजह धूमल कुछ पीछे की सीट पर चले गए थे. धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर भी पिछले दिन काफ़ी विवादों में रहे जिस वजह से भाजपा की तो किरकिरी हुई ही, धूमल की छवि और धूमिल हुई.

मज़बूत कौन?
इस बात की चर्चा चल रही है कि 9 नवम्बर को होने वाले विधानसभा चुनाव में कौन प्रदेश की राजनीति पर अधिक प्रभाव डाल पायेगा. लोकल लोगों से बात करने के बाद ऐसा लगता है कि इस बार के चुनाव में मुक़ाबला लगभग बराबरी का है लेकिन बतौर मुख्यमंत्री लोग वीरभद्र सिंह को ही पसंद करते हैं. भाजपा भी इस बात को भली-भांति समझती है और चुनाव को समीकरण के आधार पर लड़ रही है.

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