हिंदी और उर्दू भाषाओं का आपस में अटूट रिश्ता है: राम नाइक

लखनऊ: हिंदी और उर्दू दो ऐसी ज़बानें हैं जिन्हें एक दूसरे की बहनें कहा जाता रहा है. दोनों अपने आप में मिठास से भरी हुई हैं. कोई अगर हिंदी भी बोलता है तो उसमें कुछ ना कुछ उर्दू के लफ़्ज़ आ ही जाते हैं और जो उर्दू बोलता है वो भी हिंदी के लफ़्ज़ का प्रयोग करता ही है.कुछ इसी तरह की बात शनिवार को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक ने कही. राम नाइक ने प्रोफ़ राम स्वरुप सिन्दूर सम्मान समारोह के दौरान कहा कि हिंदी और उर्दू का अटूट रिश्ता है. इस समारोह में हिंदी और उर्दू के रचनाकार एक मंच पर नज़र आये. इसके साथ ही प्रोग्राम में एक मुशायेरे का आयोजन भी किया गया.

इसके अलावा उन्होंने प्रोफ़ सिन्दूर के बारे में भी कुछ बातें कहीं. उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रोफ़ सिन्दूर को ना कभी पढ़ा है और ना ही वो उनके बारे में ज़्यादा कुछ जानते ही हैं लेकिन जिस तरह से उनके बारे में लोगों ने अपने विचार रखे हैं उससे ऐसा लगता है कि वो बहुत चिंतन करने वाले संवेदनशील रचनाकार थे.

लखनऊ की संगीत नाटक अकादमी में हुए इस समारोह में हिंदी साहित्य में विशेष योगदान देने के लिए माहेश्वर तिवारी और उर्दू के लिए मशहूर गीतकार और शा’इर इब्राहिम अश्क को प्रोफ़ राम स्वरुप सम्मान 2017 से नवाज़ा गया. इब्राहिम अश्क ने कई मशहूर फ़िल्मों के गीत लिखे हैं.सम्मान स्वरुप स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र, अंगवस्त्र और 25000 रूपये दिए गए.

सिन्दूर मेमोरियल अकादमी की ओर से हुए सम्मान समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश सरकार में पर्यटन मंत्री डॉ रीता बहुगुणा जोशी ने की. इस मौक़े पर संयोजक उस्ताद युगांतर सिन्दूर, डॉ महमूद रहमानी, पद्मश्री इरशाद मिर्ज़ा तथा अन्य लोग मौजूद रहे.

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