क्या राहुल-वीरभद्र के मतभेद बनेंगे कांग्रेस की जीत में रोड़ा.. या अकेले ही हिमाचल जीतेंगे “राजा साहब”

शिमला: हिमाचल प्रदेश में 9 नवंबर को चुनाव होने वाले हैं। राज्य में फिर से वापसी करने के लिए बीजेपी अपनी पूरी ताक़त लगा रही है। चुनाव प्रचार के लिए पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह समेत पार्टी के बड़े नेता लगातार हिमाचल प्रदेश के दौरे कर रहे हैं वहीँ राज्य में चुनाव प्रचार के लिए सत्तारूढ़ कांग्रेस की हालत खस्ता है। कांग्रेस की तरफ से सीएम उम्म्मीदार वीरभद्र सिंह अकेले ही विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ६ नवंबर को राज्य में सिर्फ 1 दिन के दौरे पर आ रहे हैं। बाकी चुनाव प्रचार राज्य के ही कांग्रेस नेता कर रहे हैं। सूत्रों की मानी जाए तो सीएम वीरभद्र सिंह और राहुल गाँधी के बीच जो तनातनी हैं उसके चलते राहुल गांधी हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव पर इतना जोर नहीं दे रहे हैं। दरअसल मामला कुछ यूं है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के मुख्यमंत्री कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को ही अपना नेता मानते हैं।हिमाचल चुनाव के लिए पहले सोनिया गांधी राज्य का दौरा करने वाली थी लेकिन उनकी तबियत में खराबी होने के चलते उनका दौरा रद्द कर दिया गया है. इसलिए राहुल गांधी 6 नवम्बर को राज्य का दौरा करके तीन रैलियाँ करेंगे लेकिन वीरभद्र सिंह राहुल गांधी को अपना नेता नहीं मानते हैं। वह सोनिया गांधी का काफी सम्मान करते हैं और उन्ही को अपना नेता मानते हैं जिसके चलते राहुल गांधी हिमाचल प्रदेश की जगह गुजरात विधानसभा चुनाव पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।

कांग्रेस के प्रचार की कमान एक अकेले वीरभद्र सिंह ने संभाल रखी है और वह राहुल गांधी को अब भी नज़रअंदाज़ कर रहे हैं। वीरभद सिंह की ये बात राहुल को इस कदर नागवार गुजरी कि राहुल ने भी चुनावी नतीजे की चिंता किए बिना इसे वीरभद्र के हवाले कर दिया है।

हालांकि हिमाचल प्रदेश में सीएम वीरभद्र सिंह की जनता में काफी लोकप्रियता है और यहाँ उन्हें “राजा साहब” कह कर ही पुकारा जाता है।उनकी लोकप्रियता कांग्रेस के चुनाव प्रचार में भी खूब देखने को मिल रही है।
एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, बीजेपी नेताओं समेत ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं। वहीँ सीएम वीरभद्र सिंह को राज्य की जनता पर विश्वास है कि वह उनका साथ देंगे। हाल ही में राज्य के ऊना जिले में एक रैली को संबोधित करते हुए वीरभद्र सिंह ने कहा है कि बीजेपी अपने तमाम नेताओं के साथ राज्य की जनता को लुभाने की कोशिशें कर ले लेकिन मैं उनसे डरने वाला नहीं हूं। उन्होंने कहा कि बीजेपी जिस तरह से चुनाव प्रचार करने में लगी है, वह चुनाव प्रचार नहीं लग रहा। बल्कि एक जंग का माहौल प्रतीत हो रहा है। उन्होंने कहा कि मेरी लोकप्रियता को देख बीजेपी के लोग घबरा गए हैं। एक ही बात के लिए तीन-तीन केस बनाकर ईडी, सीबीआई, आयकर विभाग को मेरे पीछे ऐसे लगा दिया जाता है, जैसे मैं बहुत बड़ा व्यापारी हूं या फिर देशद्रोही हूं। लेकिन कांग्रेस ने राज्य में हमेशा विकास करवाया है। जिससे जनता भली-भांति परिचित है। केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के साथ भेदभाव की निति अपनाई है और प्रदेश सरकार को भी तोड़ने की तमाम कोशिशें की। लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया।

यूं तो वीरभद्र सिंह के दावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता लेकिन कांग्रेस के अंदरूनी सियासी समीकरण कुछ और ही बयां करते हैं। राहुल गाँधी और वीरभद्र सिंह में आपसी मतभेद पार्टी की हार का कारण भी बन सकते हैं। क्यूंकि इन दोनों बड़े नेताओं के बीच की दूरियों को फायदा सीधे तौर पर बीजेपी को हो रहा है। हिमाचल में चुनाव प्रचार का पूरा जिम्मा मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कंधों पर हैं। यूं तो कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के लिए 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है, मगर चुनाव से 4 दिन पहले भी चुनाव प्रचार के लिए पार्टी नेता आगे नहीं आ रहे हैं। अभी तक किसी भी स्टार प्रचारक के चुनाव में उतरने की सूचना नहीं है। फिलहाल राहुल गाँधी 6 नवंबर को राज्य में 3 रैलियां करेंगे.

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