हुज़ूर पाक(स.अ.व.)की क'ब्र मुबारक का ये वाक़िया,हर इश्के रसूल को सुनना चाहिए

February 19, 2019 by No Comments

आज हम यहाँ पर अल्लाह के रसूल सल्लाहू अलैहि वसल्लम के क़ब्र मुबारक के बारे में एक ऐसा वाकया बयान करने जा रहे हैं जिसे पढ़ कर आप झूम उठेंगे,आप का दिल बाग बाग हो जाएगा।यह वाकया इस्लामी कलेंडर के मुताबिक पहली सदी का ही है और उस वक़्त अल्लाह के रसूल सल्लाहू अलैहि वसल्लम के क़’ब्र मुबारक पर जाने के लिए मनाही नहीं थी.
लोग जाते थे और अल्लाह के रसूल सल्लाहू अलैहि वसल्लम के क़’ब्र मुबारक को चूमते थे और वहाँ पर देर तक बैठ कर दुआ मांगते थे।लेकिन सुरक्षा को देखते हुये दीवार खड़ी कर दी गई है,इसलिए अब कोई भी क़’ब्र मुबारक तक नहीं जा सकता है।जो वाकया हम यहाँ पर बयान करने जा रहे हैं,वह एक एराबी (दीहाती) शख्स का है।

यह वाकया अल्लामा इबने कदामा और इबने कसीर ने बयान किया है कि एक जमात ने हज़रत अतबी रज़ी अल्लाहु अनहु से रिवायत किया है कि हज़रत अतबी रज़ी अल्लाहु अनहु अल्लाह के रसूल सल्लाहू अलैहि वसल्लम क़ब्र-ए-अनवर के पास बैठा हुआ था बैठे हुये थे,कि एक एराबी (दीहाती) क़ब्र अनवर पर हाज़िर हुआ और अर्ज़ किया। اَلسَّلَامُ عَلَيْکَ يَا رَسُوْلَ اﷲِ.
सलाम के बाद उस एराबी शख्स ने अर्ज़ किया या रसूलुल्लाह सललल्लाहु अलैहि वसल्लम मैंने सुना है कि وَلَوْ أَنَّهُمْ إِذْ ظَلَمُوْا أَنْفُسَهُمْ جَاءُ وْکَ فَاسْتَغْفَرُوا اﷲَ وَاسْتَغْفَرَ لَهُمُ الرَّسُوْلُ لَوَجَدُوا اﷲَ تَوَّابًا رَحِيْمًا तरजमा:अगर वो लोग जब अपनी जानों पर ज़ुलम कर बैठे थे आपकी ख़िदमत में हाज़िर हो जाते और अल्लाह से माफ़ी मांगते और रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम भी उनके लिए मग़फ़िरत तलब करते तो वो (इस वसीला और शफ़ाअत की बिना पर) ज़रूर अल्लाह को तौबा क़बूल फ़रमाने वाला निहायत मेहरबान पाते।
इस आयत को पढ़ने के बाद वह एराबी शख्स अर्ज़ करता है, या रसूलुल्लाह सललल्लाहु अलैहि वसल्लम बेशक में आपके पास अपने गुनाहों की मग़फ़िरत तलब करने और अपने रब के हाँ आपको वसीला बनाने के लिए आया हूँ। इसके बाद वह एराबी शख्स कुछ शेर पढ़ता है जो शेर यह हैं।
يَا خَيْرَ مَنْ دُفِنَتْ بِالْقَاعِ أَعْظُمُهُ فَطَابَ مِنْ طِيْبِهِنَّ الْقَاعُ وَالْأَکَمُ

ए वो बेहतरीन हस्ती! जिनकी मुबारक हड्डी इस (बा बरकत) ज़मीन में मदफ़ून हैं, पस उनके जसद-ए-अक़्दस) की पाकीज़ा ख़ुशबू से इस ज़मीन के टुकड़े और टीले भी मुअत्तर-ओ-पाकीज़ा हैं نَفْسِي الْفِدَائُ لِقَبْرٍ أَنْتَ سَاکِنُهُ فِيْهِ الْعَفَافُ وَفِيْهِ الْجُوْدُ وَالْکَرَمُ
मेरी जान इस रौजये अक़्दस पर फ़िदा हो जिसमें आप आराम फ़र्मा हैं और (आप सललल्लाहु अलैहि वसल्लम अपनी) इस क़ब्र अनवर में पाकदामनी और सखावत का सरचश्मा और मंबा हैं (जैसे अपनी ज़ाहिरी जिंदगी में थे)।हज़रत अतबी रज़ी अल्लाहु ताला अनहु आगे बयान करते हैं कि वो एराबी शख्स इसके बाद वहाँ से रोता हुआ चला गया और मेरी आँख लग गई,और मैं वहीं पर सो गया।
तो मैं उसी वक़्त ख्वाब में हुज़ूर नबी अकरम सललल्लाहु अलैहि वसल्लम की ज़यारत से मुशर्रफ़ हुआ,आप सललल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुझे फ़रमाया ए अतबी!फ़ौरन उस एराबी के पास जाओ और उसे ये ख़ुशख़बरी सुनाओ कि बेशक अल्लाह ताला ने उसे बख़श दिया है।सबहान अल्लाह!दोस्तों उस एराबी शख्स ने जो शेर पढे थे,उसके बाद जब क़ब्र मुबारक के पास इमारत बनाई गई तो दोनों तरफ के दीवारों पर वह शेर लिख दिये गए,आज भी वह शेर लिखे हुये हैं जो आप तस्वीरों में देख सकते हैं।

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