“मैं रफ़ी के बग़ैर इंडिया का तसव्वुर तक नहीं कर सकता”- लियाक़त जाफ़री

December 23, 2017 by No Comments

हरदिल अज़ीज़ गायक मुहम्मद रफ़ी साहब का कल जन्मदिन है. उनका जन्म 24 दिसम्बर, 1924 को हुआ था. जिस दौर में उन्होंने गाने गाये हैं वो दौर भारतीय संगीत इतिहास का सबसे सुनहरा दौर कहा जाता है. वो इस दौर के बेताज बादशाह कहे जाते थे.रफ़ी साहब के बारे में कहा जाता है कि वो किसी भी तरह के गानों को बहुत आसानी से गा लेते थे. उनके गाये डांस नंबर भी उतने ही हिट रहे हैं जितने उनके गाये भजन. उनको गुज़रे तो काफ़ी समय हो गया लेकिन रफ़ी साहब आज भी लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं. इसी सिलसिले में हमने मशहूर शा’इर लियाक़त जाफ़री से बात की.

लियाक़त जाफ़री ने कहा,’मैं अक्सर आँखें बंद कर के नए हिन्दुस्तान की तसव्वुर को जब ख़याल में संजोता हूँ तो चार पाँच पावरफुल चेहरे उभरते हैं…ग़ालिब/गाँधी/टैगोर/इंदिरा/मदर टेरेसा/लता मंगेशकर/रफ़ी/दिलीप साहिब/पीटी उषा/ सचिन तेंदुलकर.. इस तस्वीर को सुरीला बनाने में जो रोल लता और रफ़ी का है, किसी का नहीं. मैं रफ़ी के बग़ैर इंडिया का तसव्वुर तक नहीं कर सकता.मेरा फेवरेट हमेशा किशोर रहा है लेकिन मुझे ये कहने में कोई शर्म नहीं कि किशोर कभी इस लिस्ट का हिस्सा नहीं बन सके. आम अवाम के ज़हन में रफ़ी की शख़्सियत की सब से पावरफुल इमेज उन की आवाज़ है.”

लियाक़त जाफ़री ने कहा कि मेरे साथ ऐसा नहीं है, मेरे ज़हन में उन की शख़्सियत का सब से पावरफुल इमेज उन का “मासूम चेहरा है”. यूँ लगता है जैसे एक बच्चा जिस के चेहरे पे बे पनाह सुकून और नूर है.. किसी ऋषि मुनि अवतार पीर-पैग़म्बर की तरह.., रफ़ी की शख़्सियत का यही असर हू-ब-हू उन के गानों में उतर आया है. फिर वो भजन हो या नात… शम्मी कपूर के लिए गाया शोख़ और चंचल नग़मा हो या राजेन्द्र कुमार के लिए गया रूमानी गीत… रफ़ी मुसलसल मासूम है…पवित्र मुक़द्दस मुकम्मल’.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *