छात्रों ने पूछा सवाल-‘देश की हर बड़ी यूनिवर्सिटी में चुनाव होते हैं तो LU में क्यूँ नहीं’

September 20, 2017 by No Comments

लखनऊ: मंगलवार दिल्ली से सुबह लौटने के बाद छात्र-नेता प्रशांत मिश्रा ने जो पहला काम किया वो यही था कि वो सबसे पहले लखनऊ विश्विद्यालय के गेट नंबर एक पर पहुँचे. यहाँ छात्र-संघ बहाली मोर्चा लगातार धरना देते हुए छात्र-संघ चुनाव कराने की मांग कर रहा था. प्रशांत भी इस मोर्चे को अपना समर्थन देने यहाँ पहुंचे. कम्पोज़िट हिस्ट्री से एम्ए की पढ़ाई पूरी करने वाले प्रशांत पिछले दिनों विश्विद्यालय की राजनीति में सक्रिय रहे हैं.

इसी मोर्चे के सिलसिले में हमने उनसे बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि ये अच्छी पहल है और हम चाहते हैं कि छात्रों की बात को प्रशासन समझे और चुनाव कराये. लगातार धरने में बने हुए समाजवादी छात्रसभा के महेंद्र यादव से जब हमने इस मोर्चा के बारे में जानने की कोशिश की तो उन्होंने कहा,”ये मोर्चा छात्रों का मोर्चा है..इसमें अलग अलग दल के छात्र-नेता भी हैं लेकिन कोई पार्टी के बैनर से नहीं है”. हमने पूछा कि क्या लगता है प्रशासन चुनाव कराएगा?, तो उन्होंने कहा देखते हैं कि प्रशासन का क्या रुख़ रहता है.महेंद्र ने कहा,”प्रशासन अपनी मनमानी कर रहा है..मनमानी फ़ीस ले रहा है, हॉस्टल में खाने की स्थिति देख ही रहे हैं…इन सभी मुद्दों को हम तभी ठीक से उठा सकते हैं जब छात्रसंघ चुनाव हो जाए”.

समाजवादी छात्रसभा के माधुर्य सिंह ‘मधुर’ कहते हैं कि प्रदर्शन के बाद क्रमिक अनशन और फिर आमरण अनशन तक हम जायेंगे. उन्होंने कहा कि हमारा प्रदर्शन शांतिपूर्ण है. SFI के वैभव देव सिंह यादव ने बताया कि उनकी पार्टी इस मोर्चा का पूरा समर्थन करती है लेकिन होता यही है कि जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी तो छात्रसभा वाले प्रशासन का मुखर विरोध नहीं कर पाते थे और अब जबकि भाजपा की है तो ABVP भी बस एक स्तर तक ही विरोध करती है. छात्र-संघ बहाली मोर्चा का समर्थन ABVP, NSUI और AISA जैसे संघठनों ने भी किया है.

हालाँकि ये कहना मुश्किल है कि अगर प्रशासन चुनाव को तैयार हो जाता है और चुनाव लिंगदोह समिति पर कराये जाने की बात होती है तो ये छात्र-नेता उस पर राज़ी होंगे या नहीं. प्रशांत मिश्रा कहते हैं कि वो लिंगदोह समिति की सिफ़ारिशों का समर्थन नहीं करते लेकिन अगर उसी पर रज़ामंदी हो जाए तो उसी पर हो जाए चुनाव.

आम छात्रों की राय…
आम छात्रों से जब हमने इस बारे में बात करने की कोशिश की तो उनको ख़ास इस मोर्चा के बारे में मालूम नहीं है. कुछ छात्र-छात्राओं को तो छात्र-संघ ही नहीं पता कि क्या है. हालाँकि कुछ छात्रों ने कहा कि छात्र-संघ अगर देश की बड़ी बड़ी यूनिवर्सिटी में है तो हमारे यहाँ क्यूँ नहीं. एक छात्र ने कहा कि छात्रों की समस्या से VC को मतलब नहीं होता, वो अपनी राजनीति करते हैं तो छात्रों में से कुछ लोग अगर राजनीति करना चाहते हैं तो VC को क्या प्रॉब्लम है? जब हमने इस पर कहा कि आपको नहीं लगता छात्रसंघ की बहाली होने के बाद गुंडागर्दी बढ़ जायेगी? तो छात्र ने तुरंत कहा कि तो क्या DU और JNU जैसी यूनिवर्सिटी में लड़ाई-झगड़ा ही होता रहता है. कुछ अन्य छात्रों ने इस पर कहा कि चुनाव की मांग है तो हो जाना चाहिए बाक़ी गुंडा-गर्दी अगर हो तो उसको रोकने के लिए प्रशासन काम करे.

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