तब्लीगी जमात के इज्तिमे में सादगी से पढ़ाया गया 2500 जोड़ों का निकाह

बुलंदशहर: यहाँ तब्लीगी जमात का आलमी इज्तमा अपने अंजाम तक पहुँच गया है।इस इजि्तमे मे जहाँ दीन औ मज़हब की बातें हुई,उलेमाओं के बयान हुए ,दुआएं की गई, वहीं बहुत सादगी के साथ करीब 2500 जोड़ों का निकाह भी पढ़ाया गया। इन निकाहो की सब से खास बात यह रही कि यह बिना दहेज और बिना किसी लेन देन के अमल मे आये।

इस्लाम सादगी का पैगाम देता है।फ़िज़ूल ख़र्चों को मना करता है।निकाह के लिए भी सादगी का हुक्म है।लेकिन देखा गया है कि मुस्लिम समाज आम तौर पर शादी के मामले मे इस्लाम की तालीम से कटा हुआ रहता है।ऐसी गैर ज़रूरी रस्में ईजाद कर ली गयीं हैं जिससे दीन का कोई फ़ायदा न दुनिया का।शादी मे बैंड बाजा होना तो आम सी बात है। शादी के कार्ड छपने से लेकर वलीमे तक एक दूसरे से बढ़कर ख़र्च करने की होड़ लगी रहती है।खाने पीने का भी ऐसा इंतज़ाम किया जाता है कि जितना खाया नहीं जाता उससे ज़्यादा बर्बाद होता है। कभी समाजिक दबाव मे तो कभी लड़के वालों की मांग पर माँ बाप अपनी बेटी को हैसियत से भी अधिक दहेज देते है। देहज की कीमत लाखों और कभी कभी करोड़ रूपये से भी ऊपर पहुंच जाती है। भले ही शादी के बाद सर से पाँव तक कर्ज़ मे डूब जायें पर झूटी शानो शौक़त बाक़ी रह जाए। ऐसे मे इन 2500 जोड़ो का सादगी के साथ हुआ निकाह हर लिहाज़ से तारीफ़ के क़ाबिल है।

इज्तिमा के आखिर मे देश मे अम्न औ अमान और शाँति के लिये लाखों मुसलमानों ने माँगी दुआएँ की । लगभग 11:30 पर दुआ शुरू हुई।दुआ में भाग लेने के लिये बहुत अधिक संख्या में भीड़ सड़कों पर देखने को मिली। जो लोग पहले दो दिन इजि्तमे में शरीक नही हो सके थे ,वह भी दुआ में शरीक होने पहुँचे थे। इज्तिमा में शामिल होने वाले अक़ीदतमंदो की तादाद का सही अंदाज़ा लगाना तो मुश्किल है,लेकिन जो इन्तिज़ामात किये गए थे वो सब ना काफी साबित हुए हैं।कई किलोमीटर तक टेंट लगे हुए थे फिर भी लोग खुले आसमान के नीचे रात गुजारने पर मजबूर रहे।फ़िर भी एक अंदाज़े के मुताबिक करीब बीस लाख लोग शामिल हुए थे।

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