चंडीगढ़: लेक क्लब प्रशासन की दोहरी नीति, स्पेशल चिल्ड्रन के लिए काम कर रहे NGO EmPower को कार्यक्रम के लिए नहीं दी जगह

December 11, 2017 by No Comments

चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़, जोकि सिटी ब्यूटीफुल के नाम से जानी जाती है। लेकिन क्या वाकई में इस शहर की आबोहवा में असली खूबसूरती है या फिर दिखावटी।

इस खूबसूरत शहर के एक एनजीओ के साथ प्रशासन द्वारा किये गए बर्ताव के बाद एक कड़वा सच सामने आया है कि समाज में समानता को समान दर्जा देने की बात कहना और इसे मानना कितनी अलग बात है। चंडीगढ़ के एक एनजीओ, जोकि स्पेशल बच्चों यानी कि जिन बच्चों को हम नार्मल बच्चों से अलग देखते हैं। सच्चाई ये है कि उन हम नार्मल बच्चों से कम आंकते हैं।

इन बच्चों की डिसेबिलिटी को खत्म कर उनमें आत्म विश्वास और बराबरी के अधिकार दिलाने के लिए काम कर रहा एक एनजीओ एम्पॉवर, जिन्होंने चंडीगढ़ की प्रतिष्ठित सुखना लेक पर बने काम्प्लेक्स लेक क्लब में एनजीओ से जुड़े बच्चों के लिए प्रोग्राम करवाना था।
ये लेक क्लब स्पोर्ट्स अथॉरिटी के तहत आता है। जहाँ पर कार्यक्रम करने के लिए एनजीओ एम्पॉवर से जुड़ी कार्यकर्ता शर्मिता भिंडर ने नवंबर में अर्जी दी थी।

जिसपर लेक क्लब के प्रशासन ने 3 दिन पहले जवाब दिया है कि वह बच्चों का प्रोग्राम यहाँ पर नहीं करवा सकते हैं, क्यूंकि अब वह फ्री में बुकिंग नहीं करते हैं। जिसका किराया लगभग 25 हजार है। एनजीओ को वह देना पड़ेगा। इसके साथ इंकार का एक और कारण उन्होंने बताया कि लेक क्लब का एरिया अब साइलेंस जोन में आ गया है।

शर्मिता भिंडर ने ‘भारत दुनिया’ की पत्रकार प्रियंका शर्मा से बात करते हुए बताया कि जब वह बच्चों के कार्यक्रम के लिए बुकिंग करवाने लेक क्लब के अधिकारी से मिली तो उन्होंने उनसे सवाल पूछा कि जगह शादी के प्रोग्राम के लिए चाहिए ?
तब उन्होंने अधिकारी को एनजीओ के बारे में बताते हुए बच्चों के प्रोग्राम के लिए इसे बुक करने के लिए कहा। जिसपर उन्होंने उनकी अर्जी प्रशासन तक पहुंचाने की बात कही।
लेकिन अब उन्होंने एनजीओ को जगह देने से इंकार कर दिया है। जबकि एनजीओ ने इस कार्यक्रम के लिए सभी तैयारियां कर ली है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए बच्चों के साथ वालंटियर्स भी जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं।
शार्मिता ने बताया है कि लेक क्लब में परसो ही एक मिलिट्री साहित्यक समारोह हुआ था। जहाँ पर 15 से ज्यादा स्पीकर्स लगे हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस समारोह में शहीदों की तस्वीरों को मेन एरिया से बाहर जगह दी गई। जबकि मेन एरिया में कपड़ों किताबों और अन्य चीज़ों के स्टाल लगाए गए। जबकि एनजीओ को किसी भी तरह से स्टाल लगाने के लिए भी आनाकानी की गई थी।  शर्मिता ने बताया कि वह आर्मी बैकग्राउंड से ताल्लुक रखती है।

उनके परिवार में काफी लोग आर्मी में अफसर के तौर पर कार्यरत रह चुके हैं। इस समारोह में जाकर उन्हें महसूस हुआ है कि इस मिलिट्री समारोह जिस तरह शहीदों की तस्वीरों को मेन एरिया से बाहर जगह दी गई है, उनका सम्मान नहीं अपमान है। अब मुद्दा ये है कि अगर लेक क्लब प्रशासन इस समारोह के लिए जगह दे सकता है, साइलेंस जोन एरिया में स्पीकर्स लग सकते हैं। तो इन स्पेशल चिल्ड्रन जिन्हे समान अधिकार हैं वहां पर समारोह करने का। उन्हें क्यों नहीं मिला।
इसके खिलाफ शार्मिता ने फेसबुक पर वीडियो भी पोस्ट किया है और अपना विरोध व्यक्त किया है। एनजीओ इस प्रोग्राम के लिए अब कोई और स्थान ढूंढ रहा है। लेकिन सवाल ये है कि समाज में दोगलेपन का ये बर्ताव कब खत्म हो पायेगा। इसकी खिलाफ आवाज़ उठायें।

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