पीएम मोदी को उनके वादे याद दिलाने दिल्ली के संसद मार्ग पर जुटे देशभर के किसान

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में देश के तमाम हिस्सों से बड़ी संख्या में किसान संसद मार्ग पहुंचकर किसान मुक्ति संसद का आयोजन कर रहे हैं। देशभर से करीब 180 किसान संगठन यहाँ पर इक्क्ठे हुए हैं। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के बैनर तले किसान संगठनों ने रामलीला मैदान से संसद मार्ग तक विरोध मार्च शुरू किया है। इसमें वे अपनी फसलों के लिए बेहतर कीमतों और कर्ज से पूरी आजादी की मांग करेंगे।
स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव दिल्ली में किसानों की इस बड़ी रैली को संबोधित कर रहे हैं। इस मामले में यादव का कहना है कि हमारी दो मांगें हैं, पहली कि लाभकारी कीमतें स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार उत्पादन लागत और उसके ऊपर 50 फीसदी होनी चाहिए और दूसरी मांग है कि सभी कृषि ऋण पर एक बार छूट देनी चाहिए। जब तक केंद्र सरकार इसमें कदम नहीं उठाएगी, ऋण को माफ नहीं किया जा सकता।
गौरतलब है कि साल 2014 में लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार करते हुए देश के प्रधानमंत्री मोदी ने देश के किसानों के हित में काम करने का वादा किया था। तब पीएम मोदी ने कहा था कि अगर वह देश के प्रधानमंत्री बन जाते हैं तो किसानों को अपनी फसलों के लिए अच्छी कीमतें मिलेंगी और स्वामाीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाएगा।
लेकिन केंद्र में सत्ता हासिल करने के बाद पीएम मोदी को किसानों की समस्याओं के बारे में बताने के लिए ऐसे प्रदर्शन करने पड़ रहे हैं। क्यूंकि वह अपने वादों को भूल चुके हैं। अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष अशोक धावले ने कहा, ‘‘हमारी मुख्य मांग सही कीमत आंकलन के साथ वैध हक के तौर पर पूर्ण लाभकारी कीमतें और उत्पादन लागत पर कम से कम 50 फीसदी का लाभ अनुपात पाना है। व्यापक कर्ज माफी सहित हम कर्ज से आजादी की मांग करेंगे। किसानों की कर्ज की समस्या के हल के लिए सांविधिक संस्थागत तंत्र स्थापित किये जाने की भी मांग की जाएगी। वहीँ इस मामले में अखिल भारतीय किसान सभा के नेता ने कहा कि कीमतों में घोर अन्याय किसानों को कर्ज में धकेल रहा है, वे आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहे हैं और देश भर में बार-बार प्रदर्शन हो रहे हैं।

इस मामले में सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने इस मामले में ट्वीट कर कहा है कि दिल्ली में विरोध कर रहे किसानों की आवाज सुनाई जानी चाहिए। सोशल एक्टिविस्ट और वकील प्रशांत भूषन ने ट्वीट किया है कि जहाँ गुजरात चुनावों के लिए संसद बंद हो गया है, किसानों की दुर्दशा और फसलों के लिए उचित समर्थन मूल्य की आवश्यकता पर चर्चा करने के लिए हजारों किसान संसद मार्ग पर आये हैं। शर्म की बात है कि सरकार ने उन्हें छोड़ दिया है।

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