क्या गुजरात में भाजपा को सता रहा है हार का डर?

गुजरात में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे भाजपा के क्षेत्रीय नेताओं को एक बड़ा अजीब सा डर सता रहा है.एक ओर जहाँ दिल्ली में बैठे भाजपा नेता ये दावा कर रहे हैं कि भाजपा एक बार फिर विधानसभा चुनाव जीत रही है लेकिन दूसरी ओर क्षेत्रीय नेता इस बार को लेकर परेशान हैं कि व्यापारी, दलितों और पटेल तबक़े की नाराज़गी कैसे दूर करें.

भाजपा के नेताओं को शुरू में ऐसा लग रहा था कि गुजरात में कांग्रेस के पास कोई बहुत बड़ा नेता नहीं और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी की भी वहाँ बहुत मज़बूत पकड़ नहीं मानी जा रही थी लेकिन जिस तरह से राहुल ने गुजरात में तेवर दिखाए हैं भाजपा के नेता चौंक गए हैं.

सोशल मीडिया कैंपेन में भी भाजपा पीछे होती जा रही है. इसके अलावा भाजपा को एक झटका दा वायर वेबसाइट की उस ख़बर ने दिया है जिसमें अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनी की वित्तीय हालत में “आश्चर्यजनक” बदलाव की बात की गयी थी. इस ख़बर के मुताबिक़ जय शाह की कंपनी का एक ही साल के अन्दर 16000 गुणा व्यापार बढ़ गया. जय शाह के मामले में भाजपा नेताओं के बयान आना भी पार्टी के लिए उल्टा ही पड़ गया है. अब तक जहाँ भाजपा ख़ुद को परिवारवाद विरोधी पार्टी कहती थी अब अपने ही अध्यक्ष के बेटे को बचाने के लिए पूरी मेहनत कर रही है.

हालाँकि कांग्रेस के नेता ये मानते हैं कि राह इतनी आसान भी नहीं है. भाजपा भी पूरे दमखम के साथ इस चुनाव में लगी है और इसे अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साख से जोड़कर देख रही है.

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