क्या राज्यसभा चुनाव में अहमद पटेल से मिली हार को पचा नहीं पा रही भाजपा?

कांग्रेस के रणनीतिकार और वरिष्ट नेता अहमद पटेल पर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी द्वारा लगाए गए अजीब-ओ-ग़रीब आरोप पर कांग्रेस ने पलटवार तो कर दिया है लेकिन जानकार भाजपा के पटेल पर लगाए आरोपों को गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव की नज़र से देख रहे हैं.

सिर्फ़ इतनी ही बात भी नहीं है. कुछ जानकारों के मुताबिक़ भाजपा अभी तक राज्यसभा चुनाव में हुई हार को भुला नहीं पायी है. अगस्त में हुए राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने पूरी कोशिश की कि अहमद पटेल चुनाव ना जीत पायें लेकिन एड़ी चोटी का ज़ोर लगाने के बावजूद भी भाजपा चुनाव नहीं जीत सकी.

भाजपा के रणनीतिकार और अध्यक्ष अमित शाह के लिए ये बड़ा झटका रहा. इतना ही नहीं अहमद पटेल की जीत से कांग्रेस में ज़बरदस्त उत्साह आया. गुजरात में कांग्रेस की कैम्पेनिंग अचानक ही रंग में आ गयी. भाजपा के क्षेत्रीय नेता तो परेशान ही हुए लेकिन राष्ट्रीय स्तर के नेता भी ये समझ नहीं पा रहे कि कांग्रेस के इस नए रंग का मुक़ाबला कैसे करें. कांग्रेस ने अपने पक्ष में तीन बड़े युवा नेताओं को कर लिए है जिसकी वजह से चुनाव में उसकी स्थिति मज़बूत हो गयी है. हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकुर को रोकने के लिए भाजपा रणनीति बनाने में नाकाम ही नज़र आ रही है. अल्पेश ठाकुर के कांग्रेस में चले जाने से भाजपा को एक मौक़ा मिला तो था कि वो ये साबित करे कि ये सब कांग्रेस के एजेंट हैं लेकिन इसमें भी उसे कामयाबी नहीं मिली.

जानकार मान रहे हैं कि अब भाजपा के लिए चुनाव जीतना बहुत मुश्किल हो गया है. एक समय 150 से अधिक सीट जीतने का दावा करने वाली भाजपा के लिए बहुमत लाना भी मुश्किल लग रहा है. पार्टी ने इसी को देखते हुए गुजरात में एक नया शिगूफ़ा छेड़ा है जिसे कुछ लोग साम्प्रदायिक भी मान रहे हैं.

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