जिन घरो में यह चार चीज़े होती है वहां नही आते है ‘रहमत’ के फ़रिश्ते ,नबी ऐ करीम ने फ़रमाया …

जहां कुत्ता हो वहां रहमत के फ़रिश्ते नहीं आते हैं,,और शरीयत मुतह्हरा ने मुस्लमानों के लिए कुत्ता पालने को ना सिर्फ हराम क़रार दिया है बल्कि इस हुक्म की मुख़ालिफ़त करने वाले को बतौर जुर्माना उसके नामा आमाल से रोज़ाना एक या दो क़ीरात नेकियां कम कर दी जाती हैं,लेकिन शिकार, या जानवरों और खेत की निगरानी के लिए कुत्ता रखना जायज़ है

और वो इस जुर्माने वाले हुक्म से मुस्तसना हैं हज़रत अब्बू तलहा रज़ी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है कि रसूलﷺ ने फ़रमाया -“रहमत के फ़रिश्ते उस घर में दाख़िल नहीं होते जिस में कुत्ता या तस्वीर हो.”

हज़रत आईशा रज़ी अल्लाहू अन्हा बयान करती हैं कि एक दफ़ा हज़रत जिबरईल अलैहिस-सलाम ने रसूल सल्ल्लाहू अलैहि वसल्लम के पास एक मुतय्यन वक़्त में आने का वाअदा किया वक़्त गुज़र गया लेकिन हजरत जिबरईल अलैहिस-सलाम ना आए उस वक़्त रसूलﷺ के हाथ में एक लकड़ी थी

आपने उसे अपने हाथ से फेंक दिया और फ़रमाया : कि अल्लाह-तआला वादा-ख़िलाफ़ी नहीं करता ना उस के क़ासिद वादा-ख़िलाफ़ी करते हैं फिर आपने इधर उधर देखा तो एक पिल्ला यानी कुत्ते का बच्चा आपकी चारपाई के नीचे दिखाई दिया आपने फ़रमाया ए आशा ये इस जगह कब आया ?

उन्होंने कहा अल्लाह की क़सम मुझे इलम नहीं ,आपने हुक्म दिया वो बाहर निकाला गया फिर जब जिबरईल आए तो रसूलﷺने फ़रमाया आपने मुझसे वाअदा किया था और मैं आपके इंतिज़ार में बैठा रहा लेकिन आप नहीं आए ,तो जिबरईल ने कहा ये कुत्ता जो आपके घर में था उसने मुझे रोक रखा था

जिस घर में कुत्ता और तस्वीर हो हम वहां दाख़िल नहीं होते.इसके इलावा जिन घरों में तस्वीर होती है उस में भी रहमत के फ़रिश्ते नहीं आते हैं, वहीँ जिन घरों में लड़ाई झगडा होता है, रिश्तेदारी तोड़ी जाती है उन घरों में भी रहमत के फ़रिश्ते नहीं आते हैं,इस लिए इन सब चीज़ों से बचना चाहिए.

क्योंकि जब रहमत के फ़रिश्ते हमारे घरों में नहीं आयेंगे तो हमारे घरों में परेशानी बढ़ेगी. रोज़ी तंगी आएगी, वहीँ आलाह ताला की नाराजगी भी हो सकती है. इस लिए जिस तरह इस्लाम ने हमें जिंदगी गुज़ारने का तरीका सिखाया है उसी के मुताबिक अपनी जिंदगी गुजारें.

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