लालू लहर देख कर घबरा गए हैं पीके?, कह दी बड़ी बात…

October 23, 2018 by No Comments

पटना: नीतीश कुमार ने जेडीयू में शामिल हुए प्रशांत किशोर को पार्टी में नंबर दो की कुर्सी देते हुए उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है. जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने चुनाव लड़ने संबंधी सारे कयासों पर विराम लगा दिया है. पीके ने स्पष्ट कर दिया है कि वो पार्टी के रणनीतिकार की ही भूमिका में रहेंगे. सोमवार को पटना में मुख्यमंत्री आवास एक अणे मार्ग में जदयू के छात्र और युवा कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों के साथ बैठक के दौरान पीके ने साफ किया कि उनकी प्राथमिकता संगठन की मजबूती ही है.

पीके ने लेकिन इस दौरान कुछ ऐसा भी कह दिया जिससे ये ज़ाहिर हो गया कि वो बिहार में लालू लहर से घबरा गए हैं. उन्होंने कहा कि ” वे लोकसभा या राज्यसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे बल्कि आने वाले 10 साल तक सिर्फ बिहार की सेवा करेंगे. दो दिनों तक अलग-अलग बैठक करने के बाद पीके ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव और और 2020 के विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण में पार्टी पुराने चेहरों की बजाए युवाओं को प्राथमिकता देगा”.

जानकार मानते हैं कि पीके इस बात को भली-भांति समझ चुके हैं कि वो अगर इस समय चुनाव लड़ते हैं तो जीतना उनके लिए मुश्किल हो जाएगा. 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव से लेकर 2014 के आम चुनावों में नरेंद्र मोदी के प्रचार अभियान का अहम हिस्सा रहे प्रशांत किशोर की महत्वकांक्षा थी कि मोदी सरकार के गठन के बाद सरकार के नीतिगत फैसलों में उनकी भूमिका रहे.

इस मुद्दे पर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मतभेद के बाद किशोर ने अपना रास्ता बदल लिया और तब मोदी के धुर विरोधी नीतीश कुमार के साथ जुड़ गए. वहीं कांग्रेस के साथ भी यूपी और पंजाब में काम करने के बावजूद पार्टी के नेताओं ने उन्हें स्वतंत्र होकर काम नहीं करने दिया.

नीतीश के साथ प्रशांत इसलिए सहज हैं क्योंकि प्रशांत की तरह नीतीश भी यह दिखा चुके हैं कि मौका पड़ने पर कांग्रेस और बीजेपी दोनो के साथ काम करने में उन्हें कोई गुरेज नहीं होगा. नीतीश कुमार 2013 में मोदी विरोध के नाम पर एनडीए का साथ छोड़ते हुए लालू यादव और कांग्रेस के साथ जुड़ गए और संघ मुक्त भारत की बात करने लगे. फिर रातोरात आरजेडी और कांग्रेस का साथ छोड़कर फिर से बीजेपी के साथ आते हुए एनडीए का हिस्सा हो गए.

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